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ब्राह्मण को राष्ट्रपति और दलित को उपराष्ट्रपति बनवाने की कोशिश में आरएसएस

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी जब पांच राज्यों के चुनावी महासमर में फंसी हुई है, तब उसके मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेता अगले राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति का तानाबाना बुन रहे हैं। देश केअगले राष्ट्रपति के रूप में संघ की पहली पसंद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी हैं। जबकि संघ उपराष्ट्रपति पद पर किसी दलित नेता को देखना चाहता है।

राष्ट्रपति भवन में जोशी और उपराष्ट्रपति निवास में किसी दलित को बिठाकर संघ नेतृत्व हिंदुओं के शीर्षस्थ समुदाय ब्राह्मणों और दलितों को एकजुट करके हिंदुत्व एकीकरण के एजेंडे को अगले आम चुनाव से पहले नई धार देना चाहता है। दलितों के जो तीन नाम चिह्नित किए गए हैं, उनमें केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलौत, महाराष्ट्र के भाजपा के राज्यसभा सांसद नरेंद्र जाधव और लोकसभा के सांसद उदित राज शामिल हैं।

संघ नेतृत्व का मानना है कि राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए जरूरी मतों के आंकड़े से एनडीए के पास अभी करीब 70 हजार मत मूल्य की कमी है। जरूरी बहुमत जुटाने के लिए भाजपा को एनडीए के बाहर के कुछ दलों के समर्थन की भी जरूरत होगी, अत: राष्ट्रपति पद के लिए ऐसे नाम को आगे किया जाए जिसकी योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता निर्विवाद हो और आसानी से अन्य दलों का समर्थन जुटाया जा सके।

संघ को यह आशंका भी है कि अगर किसी हल्के कद के व्यक्ति को आगे किया गया तो कांग्रेस और अन्य भाजपा विरोधी दल उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का नाम राष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ाकर धर्मनिरपेक्षता का कार्ड खेलकर सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।

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