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ब्लड बैंक में एक साल से खून नहीं

दानापुर 26 जून : अज़ला सतही अस्पताल को मिसाली अस्पताल बनाया गया है। अस्पताल में आम इलाज से लेकर तर्सिल और सिजेरियन तक की इंतज़ाम है। लेकिन, ख्वातीन डॉक्टरों की तादाद काफी होने के बाद भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। नर्स और दाई

दानापुर 26 जून : अज़ला सतही अस्पताल को मिसाली अस्पताल बनाया गया है। अस्पताल में आम इलाज से लेकर तर्सिल और सिजेरियन तक की इंतज़ाम है। लेकिन, ख्वातीन डॉक्टरों की तादाद काफी होने के बाद भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। नर्स और दाई के भरोसे तर्सिल (डिलीवरी) कराया जाता है। सिजेरियन के मामले में पीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है। सिर्फ कागजात पर इस अस्पताल को मिसाली अस्पताल एलान कर दिया गया है। यहां डॉक्टर तो हैं, पर सामान नहीं।

40 बेडों से चलाया जाता है काम

60 बेडोंवाले इस अस्पताल में सिर्फ 40 बेडों से ही काम चलाया जाता है। मरीजों के बेड पर चादर नहीं रहती। इमरजेंसी में डॉक्टर शदीद तौर से जख्मी और मरीजों का ही इलाज करते हैं। सर्दी- खांसी और बुखार लगने पर काउंटर पर ड्यूटी में तैनात अहलकार पुरजा नहीं काटते। यहां ओपीडी में रोजाना करीब पांच सौ से ज्यादा मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं।

अल्ट्रासाउंड डेढ़ साल से बंद

अस्पताल मेंअल्ट्रासाउंड गुजिस्ता तकरीबन डेढ़ साल से बंद है। इस वजह से मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर जाना पड़ता है। वहीं, अस्पताल में ब्लड बैंक के लाइसेंस का रिनुअल नहीं होने की वजह गुजिस्ता एक साल से ब्लड बैंक में खून नहीं है। एक्स-रे मशीन में पांच सालों से जंग लग रही है। ऑउटसोर्सिग के ज़रिये अस्पताल में एक्स- रे कराया जा रहा है़ एक्स-रे के साथ ही ऑउटसोर्सिग पर खून और पेशाब जांच मुफ्त करायी जाती है।

रात में इमरजेंसी डय़ूटी में ख्वातीन डॉक्टर कभी-कभार ही आती हैं और जो आती हैं वह डॉक्टर रूम में आराम करती नजर आती हैं। अस्पताल में गला, नाक-कान, शिशु रोग, हड्डी रोग, प्लास्टिक सजर्री, सजर्न, फिजिशियन और खातून रोग माहेरीं तैनात तो हैं, पर सामान नहीं हैं। इससे डॉक्टरों को इलाज करने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। अस्पताल में तरक्की के नाम पर गुजिस्ता साल करीब 20 लाख की रक़म यी थी। इस साल करीब 40 लाख की रक़म का मुख्तिस किया गया है।

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