Friday , October 20 2017
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ब्वॉय फ्रैंड,गर्लफ्रेंड कल्चर से मुस्लमानों की नई नसलें मुतास्सिर !

(मो जसीम उद्दीन निजामी) मोबाइल फ़ोन अब हमारी ज़िंदगी का लाज़िमी हिस्सा बन चुका है जिस से अब फ़रार मुम्किन नहीं , मगर हमारी नई नसलें इस जदीद टैक्नालोजी का ग़लत मक़सद के लिए इस्तिमाल कर रही हैं जिस से ना सिर्फ उन के अख़लाक़ और किरदार त

(मो जसीम उद्दीन निजामी) मोबाइल फ़ोन अब हमारी ज़िंदगी का लाज़िमी हिस्सा बन चुका है जिस से अब फ़रार मुम्किन नहीं , मगर हमारी नई नसलें इस जदीद टैक्नालोजी का ग़लत मक़सद के लिए इस्तिमाल कर रही हैं जिस से ना सिर्फ उन के अख़लाक़ और किरदार तबा ह हो रहे हैं बल्कि पूरा मुआशरा तबाही और बर्बादी के गढ़े में गिरता जा रहा है अलमीया ये हीका उन की किसी भी ग़लत हरकात-ओ-सकनात से ना सिर्फ वालदैन की बदनामी होती है बल्कि पूरी को म को रुसवा होना पड़ता है ।

इस मुआमले में जिन्सी मसावात के नाम पर घरों से मिलने वाली आज़ादी ,मख़लूत तर्ज़ तालीम ए विर्मो बावल फ़ोन सब से अहम तरीनकिरदार अदा कररहा है । ज़राए के मुताबिक़ शहर और मुज़ाफ़ात में मू जो द तक़रीबन कॉलिजस(जहां मख़लूत तालीम राइज ही)में ज़ेर-ए-तालीम लड़के और लड़कीयों की अक्सरीयत ,ख़ाह मुस्लिम होया ग़ैर मुस्लिम, ब्वॉय फ्रैंडऔर गर्लफ्रेंड कल्चर के शिकार हैं।

मज़हब इस्लाम औरतों को पर्दे का हुक्म देता है मगर मख़लूत तर्ज़ तालीम बिलकुल आम होजाने के सबब लड़के और लड़कीयों के दरमयान बराह-ए-रास्त मेल जोल को फ़रोग हासिल हुआ है और इस में मुलव्विस(शामिल) लड़कीयों को माह रमज़ान के तक़द्दुस का भी ख़्याल नहीं वो इस मुबारक महीने में भी अपनी ख़रमसतीयाँ जारी रखे हुए हैं जिसे ज़ेर नज़र तस्वीर में देखा जा सकता है।

बावसूक़ ज़राए के मुताबिक़ इबतिदा , में ये नौजवान लड़के और लड़कीयां दोस्ती के नाम पर अंडर स्टैंड नग करते हैं और फिर उस अंडर स्टैंडिंग को love मैरिज में ढालने के मुतमन्नी होते हैं । सच्च तो ये है कि नौजवान लड़के लड़कीयों के दरमयान जितना फ़ासिला होगा इतना ही गुनाह के मवाक़े कम से कमतर होंगे और उन में जितना क़ुरब(नजदीकी) होगी इतना ही फ़ित्ना में मुबतला होने का ख़तरा ज़्यादा होगा, इसी लिए नबी करीम (स) ने अजनबी औरत-ओ-मर्द के साथ तन्हाई इख़तियार करने से मना फ़रमाया है इबन अब्बास ओ से रिवायत है कि रसूल अललहऐ ने फ़रमाया , ” तुम में से कोई किसी अजनबी औरत के साथ तन्हाई इख़तियार ना करे ,मगर महर्रम के साथ” और ये कि ” मैंने अपने बाद मर्दों के हक़ में औरतों से ज़्यादाख़तरनाक फ़ित्ना कोई और नहीं छोड़ा (मुत्तफ़िक़ अलैह)”

मगर फ़रमान नबवी से रु गरदानी का नतीजा ये है कि इस किस्म का इख़तिलात अब बैन मज़हबी शादीयों और पार्टनर शिप की सूरत में ज़ाहिर हो रहा है और मुस्लिम लड़कीयां इर्तिदाद का शिकार हो रही हैं ।

ज़राए का कहना है कि ख़ुसूसन ऐसे घराने की लड़के और लड़कीयां जिनके वालिद बैरून-ए-मुल्क रहते हैं,बेराह रवी की ज़्यादा शिकार होते हैं चूँकि उन्हें कंट्रोल करने वाला कोई नहीं रहता और उन्हें मुकम्मल आज़ादी हासिल होती है ।शहर में मौजूद एक इंजिनियरिंग कॉलिज के प्रोफ़ैसर ,जिन्हों ने अपनी शनाख़्त पोशीदा रखने को कहा,के वालदैन की जानिब से हद से ज़्यादा लाड प्यार ,उनकी हर बजा और बेजा ख़्वाहिशों की तकमील और आँख बंद कर के उन पर भरोसा करना भी नई नसल में बढ़ती हुई बद अख़्लाकी और बदकिर्दारी की एक बड़ी वजह है।

तलबा-ओ-तालिबात के लिए मोबाइल फ़ोन को बुराई का जड़ क़रार देते हुए उन्हों ने कहा कि इस से ना सिर्फ बुराईयां बढ़ रही हैं बल्कि तालीम प्रभी शदीद मनफ़ीअसरात मुरत्तिब हो रहे हैं अक्सर तलबा-ओ-तालिबात क्लास ख़तम होते है अपने अपने मोबाइल फ़ोन पर इस तरह मसरूफ़ हो जाते हैं गो यावा इंतिहाई बेसबरी से क्लास ख़तम होने का ही इन्तिज़ा रकर रहे हूँ।

उन्होंने कहा कि इन सरगर्मीयों पर वालदैन की जानिब से सख़्ती से नज़र रखने की ज़रूरत है , बाक़ौल उनके ,अगर इस तरफ़ फ़ौरी तवज्जा नहीं दी गई तो मुस्तक़बिल में उसके क्या इतने बुरे नताइज बरामद हो सकते हैं , जिस का अंदाज़ा भी नहीं किया जा सकता।

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