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बड़े जानवरों को पालना मुश्किल। ख़रीद-ओ-फ़रोख़त पर पाबंदी

हैदराबाद 22 सितंबर: मुल्क भर में बिलख़सूस पड़ोसी रियासत महाराष्ट्रा में गावकुशी पर इमतिना आइद किए जाने के बाद हालात इंतेहाई अबतर हो चुके हैं।

रियासत तेलंगाना के इन अज़ला में जो पड़ोसी रियासत कर्नाटक और महाराष्ट्रा की सरहद से मिलते हैं, इन इलाक़ों में भारी तादाद में बड़े जानवर पहुंच रहे हैं जिनका कोई पुरसान-ए-हाल नहीं है। महाराष्ट्रा में बड़े गोश्त के इस्तेमाल पर पाबंदी और गावकुशी पर मुकम्मिल इमतिना के सबब पड़ोसी रियासत में चरवाहे और उन बैलों को पालने वाले अफ़राद रियासत तेलंगाना के ज़िला निज़ामबाद के इलाके बोधन के अलावा दुसरे मुक़ामात पर पहुंच कर अपने बड़े जानवर फ़रोख़त करने की कोशिश कर रहे हैं।

बड़े जानवरों की फ़रोख़त शहरी इलाक़ों में जहां मुश्किल होती जा रही है, वहीं देही इलाक़ों और अज़ला में चरवाहे और बड़े जानवर पालने वाले अपने जानवर फ़रोख़त करने के लिए कोशिशें करते नज़र आरहे हैं जबकि सैंकड़ों की तादाद बड़े जानवर लावारिस छोड़ दिए गए हैं जिनकी वजह से हाईवे की ट्रैफ़िक में ख़लल पैदा हो रहा है। महाराष्ट्रा के सरहदी अज़ला में जानवर फ़रोख़त करने वाले इस हद तक तमानीयत देते हुए बड़े जानवर की फ़रोख़त को आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिस वक़्त तक क़ुर्बानी दे दी जाती, उस वक़्त तक पैसा अदा ना किए जाएं।

कई किसान जो अपने बैल फ़रोख़त करना चाहते हैं, पाबंदीयों के बाइस फ़रोख़त नहीं कर पारहे हैं, वो लोग ईद-उल-अज़हा के मौके पर अपने बैल मुसलमानों के हाथों फ़रोख़त करने की कोशिश में मसरूफ़ हैं और घर तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी क़बूल करने भी तैयार हैं।

किसानों का कहना हैके वो अपने बैल ईद-उल-अज़हा के मौके पर फ़रोख़त करते हैं चूँकि बेशतर बैल ख़ुद उन पर बोझ साबित होते हैं। वो किसान अब आइद करदा पाबंदीयों के बाइस ईद अज़हा के बाद अपने जानवरों को चारा डालने और पालने की सकत नहीं रखते।

उनका कहना हैके जो बेल उमूमन खेती या दुसरे कामों के काबिल नहीं रहते , उन्हें फ़रोख़त करते हुए वो अपने सामान गुज़र बसर का बंद-ओ-बस्त करलेते थे लेकिन अब एसा मुम्किन नहीं होगा और किसान अपने जानवर पालने के मौक़िफ़ में भी नहीं होंगे।

बोधन के अलावा अतराफ़ के सरहदी इलाक़ों में बड़े जानवर की क़ीमत कोई इज़ाफ़ा नहीं देखा जा रहा है जबकि शहरी इलाक़ों में बड़े जानवर की फ़रोख़त में होने वाली दुशवारीयों से मुश्किलात पैदा हो रही हैं।

सोश्यल मीडीया के ज़रीया बड़े जानवर की फ़रोख़त के मुक़ामात की तशहीर और गै़रज़रूरी तबसरे के बाइस गाव रखशा के नाम पर सरगर्म तन्ज़ीमों को मुश्तइल करने की बाज़ गिरोह कोशिश कर रहे हैं जिनसे चौकस रहना ज़रूरी है।

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