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बड़े बगावत की ओर बढ़ रही बीजेपी, आदित्यनाथ-राजनाथ आमने सामने

सीएम कैंडिडेट की रेस से किसी को कैसे बाहर किया जाए इस पर राजनीति चल रही है. बीजेपी में अंदरखाने जो चल रहा है, वह कुछ ऐसा ही इशारा कर रहा है। हर सर्वे में योगी आदित्यनाथ के आगे निकलने के बावजूद बीजेपी आलाकमान यह कत्तई नहीं चाहता कि उन्हें सीएम कैंडिडेट के रूप में प्रोजक्ट किया जाए। जिस पर पार्टी दाव खेलना चाहती है वह निजी सर्वे में ही सबसे निचले पायदान पर दिख रही हैं। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व कुछ अलग करना चाहता है, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।दरअसल, यूपी बीजेपी में इस समय सबसे अधिक सिर फुटौव्वल सीएम कैंडिडेट को लेकर चल रही है।

हर रोज एक नए नाम को प्रश्रय देकर कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ाई जा रही है। बीजेपी भी अब इससे निजाद पाना चाहती है। कारण दो दिन बाद होने वाले राष्ट्रीय कार्यसमिति में सीएम कैंडिडेट पर आम सहमति बनाना। लेकिन पिछले 24 घंटे में जिस तरह से बीजेपी में समीकरण बदल रहे हैं, वह एक बगावत को चिंगारी देता दिख रहा है। इसी का नतीजा रहा कि योगी के कट्टर समर्थकों में से एक माने जाने वाले रमाकांत यादव मीडिया से मुखातिब हुए और राजनाथ सिंह के खिलाफ जमकर बरसे। रमाकांत के बागी तेवर ऐसे ही नहीं थे। दरअसल, कहीं न कहीं उन्हें बीजेपी के एक बड़े गुट का समर्थन है।

दरअसल, इस बगावत की पटकथा की शुरूआत एक दिन पहले हुई, जब पूर्वांचल के कुछ मजबूत नेता राजनाथ सिंह से मिलते हैं। इसी के साथ भाजपा के एक खेमे ने राजनाथ को सीएम कैंडिडेट के रूप प्रोजक्ट करने वाले मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल करने शुरू कर दिए। यह वह खेमा है जो मोदी और शाह का करीबी माना जाता है। राजनाथ खुद अब यूपी की सियासत में वापस नहीं आना चाहते, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व का एक बड़ा धड़ा उन्हें वापस भेजना चाहता है, ताकि जो थोड़ा बहुत दिल्ली में विरोध है वह पूरी तरह से खत्म हो जाए। इस खेमे के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर राजनाथ को सीएम कैंडिडेट के रूप में प्रोजक्ट किया जाएगा तो वे यूपी की सियासत में ही उलझ कर रह जाएंगे। यही बात योगी खेमे को नागवार गुजर रही है। इसके साथ ही विरोध की रणनीति भी तैयार होने लगी है। बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो अब सियासत हिंदुवादी संगठनों की लाबिंग की हो रही है। कोशिश है कि सारे संगठन एक मंच पर आ जाएं और अगर बीजेपी राजनाथ को प्रोजक्ट करती है तो उसका मुखर विरोध हो।

बीजेपी को उठाना पड़ सकता है नुकसान राजनाथ अगर सीएम कैंडिडेट के रूप में प्रोजक्ट होते हैं तो हिंदुवादी संगठन योगी के पक्ष में लामबंद होंगे। पूर्वांचल के कमसे कम 30 जिलों में योगी का अच्छा प्रभाव है। इसका नुकसान सीधे बीजेपी को होगा। वरुण खेमा भी उतरेगा विरोध में उधर, बीजेपी ने वरुण गांधी पर पहले कार्रवाई कर उनके समर्थकों को नाराज कर दिया है। ऐसे में अगर बगावत होती है तो वरुण समर्थकों का साथ बागियों को मिल जाएगा। अब देखना है कि आगे क्या होता है, लेकिन इतना तो तय है यूपी में बीजेपी के लिए कठिन समय शुरू होने वाला है।

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