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भगोड़ी है भाजपा, बैठे और बहस करे : नीतीश

वजीर ए आला नीतीश कुमार ने भाजपा को बहस में भाग लेने की चुनौती दी है। उन्होंने बुध को कहा कि भाजपा ‘हिट एंड रन’ (हादसा करके भागनेवाला) की किरदार छोड़ कर ‘सिट एंड डिबेट’ (बैठ कर बहस करने) की किरदार में आये। सब्र से काम लेने की नसीहत देते

वजीर ए आला नीतीश कुमार ने भाजपा को बहस में भाग लेने की चुनौती दी है। उन्होंने बुध को कहा कि भाजपा ‘हिट एंड रन’ (हादसा करके भागनेवाला) की किरदार छोड़ कर ‘सिट एंड डिबेट’ (बैठ कर बहस करने) की किरदार में आये। सब्र से काम लेने की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि अपोजिशन सिर्फ जहरीली बात कर रहा है। बोधगया मंदिर तरमीम बिल पर हुकूमत की तनकीद कर रहे भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए वज़ीरे आला ने कहा कि वह बात का बतंगड़ बना रही है।जात या मज़हब देख कर किसी डीएम या सरकारी अफसर को मुक़र्रर नहीं किया जाता है। भाजपा को अब अपोजिशन की नयी-नयी किरदान मिली है, तो जो मन में
आ रहा है, बोल रहे हैं।

अपोजिशन की तरीका पर हैरानी जताते हुए वज़ीरे आला ने कहा कि आप पब्लिक को भरमा सकते हैं, पर लॉ ऑफ जस्टिस के सामने एक मिनट खड़ा नहीं हो सकेंगे। दो महीना पहले क्यों नहीं कुछ कहते थे? बोधगया मंदिर इंतेजामिया कमेटी में अपोजिशन पार्टी के लीडर भी हैं। वज़ीरे आला ने कहा कि कौमी अकलियत कमीशन के सदारत वजाहत हबीबुल्लाह जब बिहार दौरे पर आये थे, तो उन्होंने इस जानिब ध्यान दिलाया था।

एक्ट में किसी तरह का तरमीम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही किया जा सकता है। डीएम का हिस्सा कानून की असल रूह के मुताबिक नहीं था। यह मुत्जाद भी है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में हलफ देकर तरमीम किया गया है। क्या डीएम की कोई जात या मज़हब होता है। बोधगया मैनेजमेंट कमेटी का एक्ट 1949 में बना है। मुल्क का कानून 1950 में बना। 1976 में कानून की किरदार में सेक्युलर लफ्ज़ जोड़ा गया। ऐसे में डीएम को किसी जात या मज़हब से कैसे जोड़ा जा सकता है? इस मुद्दे पर हुकूमत सुप्रीम कोर्ट में टिक नहीं पाती, इसलिए इस हिस्सा में तरमीम की गयी।

हुकूमत हर मुद्दे पर बहस को तैयार

वज़ीरे आला ने कहा कि असेंबली के सदर व विधान परिषद के चेयरमैन से बातचीत की गयी है। अपोजिशन पार्टियों से बातचीत की जायेगी। सुखाड़ समेत किसी भी मौजु पर अगर अपोजिशन अपनी बात रखना चाहता है, तो हुकूमत उसके लिए तैयार है। जवाब देने में हुकूमत पीछे नहीं हटेगी। एवान छोड़ कर जाने या हंगामा करने का कोई जवाज़ नहीं है।

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