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भागवत पर विवादास्पद टिप्पणी , मुस्लिम युवक को गिरफ्तार करने से फंसी पुलिस

भोपाल : भागवत पर विवादास्पद टिप्पणी के बाद मुस्लिम युवक को गिरफ्तार कर जिस 66ए धारा में जेल भेजा गया था वह सुप्रीम कोर्ट काफी पहले खत्म कर चुका है।  पुलिस के सामने समस्या ये है कि उसे कोर्ट के सामने चार्जशीट दाखिल करनी है लेकिन करे तो करे किस धारा में। हालांकि युवक जमानत पाकर जेल से बाहर आ चुका है लेकिन मामला पुलिस के गले की हड्डी बन चुका है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मामला चार महीने पुराना है, जब शिओपुर कस्बे की पुलिस ने 2 नवंबर को 25 वर्षीय सत्तार खान को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

कोतवाली पुलिस स्टेशन इंचार्ज सतीश सिंह चौहान का कहना हमें समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए, क्योंकि मामला दर्ज होने के काफी बाद में हमें पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66ए को रद कर दिया है। हमने मामले को जिला अभियोग कार्यालय को भेज दिया है। चौहान ने बताया कि सत्तार को इसलिए गिरफ्तार किया गया था कि स्‍थानीय आरएसएस कार्यकर्ता उसके खिलाफ बहुत गुस्से में थे। वहीं कुछ इसी तरह के मामले में राज्य की अनूपपुर पुलिस भी फंसती नजर आ रही है, जिसने आरएसएस प्रमुख मोहनभागवत के खिलाफ ही सोशल मीडिया में शेयर की गई एक तस्वीर के आधार पर दो युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दोनों युवकों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66(A)का ही उपयोग किया है। ऐसे में पुलिस फिर इस मामले में घिर सकती है।

युवक को तो कुछ दिन बाद कोर्ट से जमानत मिल गई लेकिन मामला पुलिस के गले में अटक गया। पुलिस को जल्द ही इसमें चार्जशीट दाखिल करनी है।

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