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भाजपा ने 2014 में नए नोट जारी करने का किया था विरोध, कहा ऐसा हुआ तो गरीब तबाह हो जाएगा

भाजपा सरकार ने पांच सौ और एक हजार के नोट को बदलकर नए नोट जारी किए हैं। सरकार के इस निर्णय से लोगों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग नई करेंसी नहीं मिलने और बैंकोंं के चक्कर से परेशान हैं। कई दलों को आरोप है कि सरकार का यह फैसला गैर-जिम्मेदाराना है और आम लोगों को परेशान करने वाला है। सरकार में आने से पहले भाजपा पार्टी ने खुद 2014 में पूराने करेंसी को बदलकर नए नोट जारी करने के फैसले का विरोध किया था। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस सरकार कालेधन पर काबू पाने के नाम पर 2005 से पूर्व के सभी नोटों को जो वापस लेने का जो निर्णय किया है वह आम आदमी को परेशान करने वाला है। उसके बाद भाजपा ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस की तरफ से यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि विदेशी बैंकों में कालाधन जमा करने वाले अपने चहेतों को बचा सके।

भाजपा पार्टी ने तब दलिल दिया था कि बैंक सुविधाओं से वंचित दूर दूराज के इलाकों में रहने वाले गरीब लोगों को इससे मुश्किल आएगी। उनके खून पसीने की गाढ़ी कमाई जिसे उन्होंने बुरे वक्त के लिए जमा कर के रखा है, उसे वो बदल नहीं पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस करकार की तरफ से किया गया यह फैसला लोगों को कालेधन पर दिग्भ्रमित करने के लिए किया गया है।

भाजपा का कहना था कि अगर सरकार करेंसी नोट को बदलने का फैसला करती है तो विदेशी बैंकों में अमेरिकी डालर, जर्मन ड्यूश मार्क और फ्रांसिसी फ्रांक वगैरह करेंसियों के रूप में जमा भारतीयों के कालेधन वापस नहीं आ सकेंगे। पार्टी ने कांग्रेस करकार पर आरोप लगाया था कि वो विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने का कोई इरादा नहीं रखती है। नोटों को बदलना केवल चुनावी स्टंट मात्र है।

भाजपा नेताओं ने दलील दी थी कि अगर पुराने नोटों को हटाकर नए नोट जारी किए गए तो दूर दराज के इलाकों में रहने वाले गरीबों की मेहनत की कमाई पर पानी फिर जाएगा। क्योंकि देश की 65 प्रतिशत आबादी के पास बैंकों में खाते नहीं हैं। उनका मानना था कि गांव-देहात का गरीब और आदिवासी पाई-पाई करके अपनी बेटियों की शादी-ब्याह और अन्य जरूरतों के लिए घर के आटे-दाल के डिब्बों में पैसा छिपा कर रखता है। इसका एक बड़ा कारण ऐसे इलाकों में बैंकों की सुविधा का नहीं होना है। इस वजह से अधिकतर लोग अपना धन 2005 के बाद की करेंसी से नहीं बदल पाएंगे और बिचौलियों के शोषण के शिकार होंगे।

भाजपा पार्टी ने तत्कालिक सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि 2005 के पहले की करेंसी को नए करेंसी में तब्दील करने निर्णय आम आदमी और आम औरत को परेशान करने वाला है।
गौरतलब है कि कालेधन और नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिए 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक ने 2005 से पहले के जारी सभी करेंसी नोट वापस लेने का फैसला किया था। उसके बाद 500 रुपए और 1000 रुपए समेत सभी मूल्य के नोटों को वापस से लिया गया था। रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा था कि एक अप्रैल 2014 से लोगों को 2005 से पहले के नोटों को बदलने के लिए बैंकों से संपर्क करना होगा।

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