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भारतीय कंपनियों और सरकारी संस्थानों पर चीन के हैकरों की नज़र

मुंबई : देश की एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को हाल में पता चला कि उसके आईटी सिस्टम में सेंध लग चुकी थी। उसके बाद उसने जांच के लिए प्राइवेट सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स की मदद ली। इसमें पता चला कि हैकरों ने कुछ समय पहले उसके आईटी सिस्टम में सेंध लगाई थी और उनकी पहुंच कंपनी की बेहद सेंसिटिव इंफॉर्मेशन तक हो गई थी। कंपनी ने इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं की, लेकिन हैकिंग की समस्या का यह सिर्फ एक छोटा सा किस्सा हो सकता है। इस मामले की जांच करने वालों का कहना है कि यह अटैक चीन के हैकरों ने किया था।

भारत और चीन के बीच जहां डोकलाम को लेकर विवाद चल रहा है। इस बीच, भारतीय कंपनियों और सरकारी संस्थानों पर चीन के हैकरों ने हमला बढ़ा दिया है। यह जानकारी इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों ने दी है। जिस तरह का हमला इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पर हुआ था, उसी अंदाज में ये अटैक नॉर्थ कोरिया, अफ्रीका, पूर्वी यूरोप और रूस के प्रॉक्सी सर्वर्स के जरिये किए जाते हैं, जिन्हें ट्रैस करना मुश्किल होता है। चीन के हैकर भारतीय आईटी सिस्टम्स की खामियों का फायदा उठाते हैं, जबकि सामान्य हमलों में हैकर सिर्फ आईटी सिस्टम में घुसकर ऑब्जर्व करते हैं।

अर्न्स्ट ऐंड यंग में फ़रेंसिक टेक्नॉलजी ऐंड डिस्कवरी सर्विसेज के हेड और पार्टनर अमित जाजू ने बताया, ‘आमतौर पर पड़ोसी देशों से होने वाले सायबर अटैक वीपीएन और पूर्वी यूरोप, अफ्रीका, नॉर्थ कोरिया और रूस के प्रॉक्सी सर्वर्स के जरिये होते हैं। ये हमले बहुत कॉम्प्लेक्स होते हैं। इनकी योजना अच्छी तरह बनाई गई होती है और इनका निशाना खास सेक्टर और कंपनियां होती हैं।’ एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिफेंस सहित देश के कुछ दूसरे सेक्टर्स को ऐसे हमलों में निशाना बनाया जा सकता है। कई भारतीय कंपनियों और सरकारी संस्थानों को तो तब तक इन हमलों का पता तक नहीं चलता, जब तक कि वे सायबर एक्सपर्ट्स की मदद नहीं लेतीं। उनके पास डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स की तरह एंप्लॉयीज की मुकम्मल पड़ताल करने जैसा कोई तरीका नहीं होता।

महाराष्ट्र के फॉर्मर डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस डी शिवानंदन ने कहा, ‘चीन, पाकिस्तान और ईरान के पास सायबर हैकर्स की डेडिकेटेड टीम है, लेकिन आज की दुनिया में यह बताना मुश्किल है कि कोई सायबर अटैक दुनिया के किस हिस्से से हुआ है। सभी आधुनिक मशीनें एयरक्राफ्ट, वॉरशिप, टैंक और यहां तक कि कारें भी सायबर टेक्नॉलजी से चलती हैं। पावर और डिस्ट्रीब्यूशन ग्रिड, बैंकिंग और ऑयल ऐंड कम्युनिकेशन इंडस्ट्रीज को सायबर अटैक से काफी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।’ कुछ जानकारों का मानना है कि चीन के हैकर्स फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करके भारतीयों की सोच को मैनिप्युलेट करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी आशंका जताई गई थी कि वे अमेरिका और ब्रिटेन में पहले इस तरह की कोशिश कर चुके हैं। वे अपने देश में भी ऐसा करते रहते हैं।

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