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भारत और बांग्लादेश पर भयंकर भूकंप का साया, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

नई दिल्ली : पूर्वी भारत और बांग्लादेश पर भयंकर भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। एक शोध में सामने आया है कि ये दो देश आगामी समय में भयंकर भूकंप की जद में आ सकते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 9 के लगभग होगी, जिससे भयंकर तबाही मच सकती है। इसकी चपेट में दोनों देश के करीब 14 करोड़ लोग आ सकते हैं।

मीडिया में सामने आई कुछ रिपोर्टों के अनुसार, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भारत और पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में भयंकर भूकंप आ सकता है। वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च में कहा है कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8.2 से 9 तक हो सकती है और इसकी जद में 14 करोड़ लोग होंगे। हालांकि, वैज्ञानिकों ने भूकंप कब आएगा, इस बाबत किसी तरह की भविष्यवाणी नहीं की है।

वैज्ञानिकों ने कहा है कि गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी देश के कई हिस्सों से गुजरती है। अधिक जनसंख्या होने की वजह से नदियों का जलस्‍तर कम हो गया है जिससे बालू और कीचड़ भूकंप की रेखा से उपर आ चुके हैं। जिससे खतरा अधिक हो गया है। रिपोर्ट में जिस इलाके का जिक्र किया गया है वो करीब 100 किलोमीटर तक फैला हुआ है और इस भूकंप का सेंटर बांग्लादेश और भारत की सीमा के नजदीक हो सकता है। शोध के मुताबिक बांग्लादेश का ये इलाका सबसे गरीब और घनी आबादी वाला है, जिससे भूकंप आने की स्थिति में परिणाम और बुरे हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इसके लिए जमीनी स्तर पर और सैटेलाइट जीपीएस के जरिए भारत के उत्तरी-पूर्वी हिस्से के अलावा भारत-बांग्लादेश की सीमा के इलाकों से लिए गए 2003 से 2013 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया और पाया कि बांग्लादेश में भूकंप का खतरा सर्वाधिक है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी भारत का एक बड़ा हिस्सा खतरनाक भूकंप की आशंकाओं से घिरा हुआ है। रिपोर्ट में जिस इलाके का जिक्र किया गया है, वो तकरीबन 100 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इस भूकंप का सेंटर बांग्लादेश और भारत की सीमा के नजदीक हो सकता है। हालाकि भूकंप कब आएगा इस बारे में शोध दल की अगुआई कर रहे कोलंबिया यूनिवर्सिटी के भू-वैज्ञानिक माइकल स्टेकलर ने बताया कि यह हम नहीं बता सकते कि भूकंप कब आएगा। हमारे डाटा यह दर्शाते हैं कि भूकंप आएगा, यह कल भी आ सकता है और पांच सौ साल भी लग सकते हैं। इस शोध दल में शामिल ढाका यूनिवर्सिटी के भूगर्भशास्त्री ने बताया कि वास्तव में भारतीय प्लेटें एक साल में 13-17 मिलीमीटर तक खिसक रही हैं। इसकी वजह से वहां कभी ऊर्जा संचित हो गई है, जो सौ सालों से रिलीज नहीं हुई है।

वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी दक्षिण एशिया के कई देशों से गुजरती है। अधिक जनसंख्‍या होने की वजह से नदियों का जल स्‍तर कम हो गया है, जिससे लगभग बालू और कीचड़ भूकंप की रेखा से उपर आ चुके हैं। जिससे खतरा ज्यादा हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस भूकंप का सेंटर गंगा और ब्रहमपुत्र नदी के डेल्टा से 19 किलोमीटर धरती के नीचे हो सकता है। इस भूकंप से आस-पास का 62 हज़ार स्क्वायर किलोमीटर का इलाका प्रभावित होगा।

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