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भारत की पहली ट्रांसजेंडर प्रिंसिपल ने कॉलेज में हो रहे भेदभाव के चलते दिया इस्तीफा

कोलकाता: हमारे देश में हमेशा ट्रांसजेंडरों को धुत्कारा गया है। उन्हें समाज का हिस्सा न मानते हुए उन्हें एजुकेशन और रोजगार के क्षेत्र से दूर रखा जाता रहा है। सवाल ये है कि देश बदल रहा है लेकिन क्या देश के लोगों की सोच इस मुद्दे पर बदल रही है। क्यों उनको हमेशा अलग नजरों से देखा जाता है? इसी भेदभाव का ताजा मामला सामने आया है पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर महिला कॉलेज से। जहाँ प्रिंसिपल का पदभार संभाल रहीं ट्रांसजेंडर मनाबी बंधोपाध्याय को अपने सहकर्मियों और कॉलेज के स्टूडेंट्स से लगातार मिल रहे असहयोग ने नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया।

किसी शिक्षा संस्थान में बतौर प्रिंसिपल कार्यरत होकर ट्रांसजेंडरों और समाज के आगे एक मिसाल पेश की थी। लेकिन मनाबी का कहना है कि उनके इस पद पर काम करने को लेकर सहकर्मियों और स्टूडेंट्स ने उनका साथ नहीं दिया। उनके खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहा था जिससे वह मानसिक तौर पर बहुत परेशान हो रही थी। हालांकि मुझे स्थानीय प्रशासन से पूरा समर्थन मिला लेकिन उनका स्टूडेंट्स और सहकर्मियों से सहयोग न मिलने से मैं मानसिक दबाव में आ गई, जिसे मैं और नहीं झेल सकती थी। जिसके चलते मैंने 23 दिसंबर को डीएम को अपना इस्तीफा भेज दिया।

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