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भारत के हालात ऐसे नहीं है कि मैं मेरिल स्टीप की तरह स्पीच दूं- शाहरुख खान

हाल ही में हॉलीवुड एक्ट्रेस मेरिल स्ट्रीप ने एक स्पीच में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा निशाना साधते हुए उनकी आलोचना की थी. इस स्पीच की चर्चा पूरी दुनिया में हुई. साथ ही ये सवाल भी खड़ा किया गया जब एक अमेरिकी कलाकार दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स की खुलेआम तौर आलोचना करने की हिम्मत कर सकता तो भारतीय कलाकार ऐसा क्यों नहीं कर सकते. जब यही सवाल शाहरुख खान के सामने रखा गया तो पत्रकार पर ही बरस पड़े, उलटा पत्रकारों से ही सवाल करने लगे की आखिर ये सवाल उनसे क्यों पुछा. शाहरुख खान ने कहा स्ट्रीप ने जो बोला वो अमेरिका के हालात पर था, मैं नहीं समझता भारत के हालात ऐसे हैं जैसे अमेरिका के. मेरिल स्ट्रीप जैसी सोचती थीं वो वैसी बोली पर किसी भी जर्नलिस्ट को भारत में ये सवाल मुझसे पूछने से पहले ये सोचना चाहिए कि क्या वहां के हालात और यहां के हालात एक जैसे हैं? नहीं. इसके बावजूद जो भी इस मुद्दे पर बोलेगा वो अलग तरह से बोलेगा.

शाहरुख यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा किसी भी मुद्दे पर सबसे पहले दिखाने या छापने की दौड़ में मीडिया दूसरे लोगों का इस्तेमाल करती है, क्या ये सही है? मेरिल स्ट्रीप के बयान के बाद मीडिया का ये कहना कि भारतीय कलाकार ऐसा क्यों नहीं करते, बहुत ही अजीब है. ये बिल्कुल इसी तरह है कि जैसे मुझसे कहा जा रहा है कि आप टाइगर वुड्स की तरह गोल्फ क्यों नहीं खेलते. उसने जो भी कहा, मैं उसकी बहादुरी की तारीफ करता हूं. हमारे कलाकारों को भी बोलना चाहिए, फिल्म निर्माताओं और पत्रकारों को भी बोलना चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए शाहरुख ने अपनी ये बात रखी. . , मुझे बड़ा ही अजीब लगा जब सभी पत्रकारों ने ये कहना शुरू कर दिया कि कब भारतीय कलाकार भी इस तरह बोलना शुरू करेंगे? मुझे समझ नहीं आता कि भारतीय एक्टर्स को ऐसे किसी भी मामले पर क्यों बोलना चाहिए जो अस्तित्व में ही नहीं, और फिर जब आप पूछते हैं तो हमें भी कुछ न कुछ बोलना ही पड़ता है.

शाहरुख ने कहा, मैं भी यहां पत्रकारों से सवाल पूछना चाहता हूं कि आखिर वो उस तरह का बर्ताव क्यों नहीं करते जैसा उनके सामने वाला करता है? उन्होंने टीवी शो पर लगातार बोलने वाले पत्रकारों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब टीवी डिबेट में एक पत्रकार दो एक्सपर्ट से सवाल पूछते हैं तो अक्सर देखा जाता है कि सिर्फ दो पत्रकार ही बोलते हैं बाकी जिन पैनलिस्ट को बुलाया गया होता है वे चुप बैठे दिखते हैं.
शाहरुख ने कहा, अगर आपके पास मुझसे जुड़े किसी मुद्दे पर कोई राय है तो आपको मुझसे सीधे बात करनी चाहिए. मेरी राय लेकर सकते हैं सकारात्मक या नकारात्मक. आज हर इंटरव्यू एक एडिटोरियल बन गया है.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, आप अपनी राय पर खबर न बनाएं. मैं अभी भी ये विश्वास करता हूं कि एक कलाकार अपना सर्वश्रेष्ठ किसी भी फिल्म या सीरियल में देता है. हम दर्शकों की प्रतिक्रिया को नहीं रोकते हैं और न ही बंदूक की नोक पर कहते हैं कि मेरी फिल्म को पसंद करो.
किसी भी मुद्दे पर सबसे पहले दिखाने या छापने की दौड़ में मीडिया दूसरे लोगों का इस्तेमाल करती है, क्या ये सही है? मेरिल स्ट्रीप के बयान के बाद मीडिया का ये कहना कि भारतीय कलाकार ऐसा क्यों नहीं करते, बहुत ही अजीब है. ये बिल्कुल इसी तरह है कि जैसे मुझसे कहा जा रहा है कि आप टाइगर वुड्स की तरह गोल्फ क्यों नहीं खेलते. उसने जो भी कहा, मैं उसकी बहादुरी की तारीफ करता हूं. हमारे कलाकारों को भी बोलना चाहिए, फिल्म निर्माताओं और पत्रकारों को भी बोलना चाहिए.

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