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भारत-पाक तनाव से पाकिस्तानी मरीजों पर आफत

भारत और पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्तों के बावजूद खासी तादाद में पाकिस्तानी नागरिकों का इलाज के लिए भारत आने का सिलसिला जारी है. अपोलो, मेदांता सहित राजधानी दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों ने बताया कि उनके यहां कई पाक नागरिक भर्ती हैं. ज्यादातर मरीज लिवर ट्रांसप्लांट और कार्डिएक सर्जरी विभाग में भर्ती हैं.
पाकिस्तान में जहां सामान्य बीमारियों के इलाज की सुविधा है, वहीं सुपर-स्पेशिऐलिटी सेवाएं, मसलन लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट और बच्चों की जटिल कार्डिएक सर्जरी जैसी चिकित्सा सुविधाएं वहां अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुई हैं. ऐसे में पाकिस्तानी नागरिकों को इलाज कराने के लिए भारत आना पड़ता है. अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉक्टर सुभाष गुप्ता ने बताया, ‘ट्रांसप्लांट करने के लिए मैं पाकिस्तान जा चुका हूं. लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान जब से दोनों देशों के बीच तनाव बदने लगा, तब से पाकिस्तान डॉक्टरों को वीजा देने में हिचकिचा रहा है. मरीजों को मेडिकल वीजा मिलना ज्यादा आसान है.

नवभारत टाइम्स को गंगाराम अस्पताल प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष डॉक्टर डीएस राणा ने बताया, ‘हमारे पास विदेशी मरीजों के लिए अलग शाखा नहीं है, ज्यादातर मरीज बिना किसी पूर्व अपॉइंटमेंट के ही आते है.’ डॉक्टर राणा ने बताया कि उनके अस्पताल में हर महीने औसतन 20 मरीज पाकिस्तान से आते हैं, लेकिन पिछले 2 हफ्तों के दौरान एक भी पाकिस्तानी इलाज के लिए नहीं आया है. फॉर्टिस के हार्ट इंस्टिट्यूट के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक सेठ ने कहा, ‘लिवर ट्रांसप्लांट के अलावा पाकिस्तानी नागरिक हमारे यहां अडवांस्ड कार्डिएक सर्जरी और दिल की बीमारियों के इलाज के लिए आते हैं.
दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्तों को देखते हुए इन मरीजों को डर है कि संबंध और बिगड़ने पर उनके लिए दोबारा इलाज कराने आ पाना मुश्किल साबित होगा. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित गुजरात जिले के निवासी चौधरी सफदर मुमताज संधू ने बताया, ‘मैं अपने भाई को अपोलो अस्पताल में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए लाया था. हम बाघा सीमा से होते हुए 20 सितंबर को यहां आए थे, अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यहां आ पाना नामुमकिन हो जाएगा. सफदर ने आगे कहा कि दोनों देशों के लोग जंग नहीं, बल्कि शांति और तरक्की चाहते हैं.

मेदांता में इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर ट्रांसप्लांट ऐंड रिजेनरेटिव मेडिसिन के अध्यक्ष डॉक्टर ए.एस.सोएन ने बताया कि उनके अस्पताल में विदेश से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों में करीब 15 फीसदी पाकिस्तानी नागरिक हैं. उन्होंने बताया, ‘पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में इलाज का खर्च कम है और गुणवत्ता अच्छी है. इसीलिए लोग यहां आते है.’ सूत्रों ने बताया कि भारत के कई अस्पतालों का पाकिस्तान के अस्पतालों के साथ संबंध है, जिससे कि वे अपने मरीजों को इन भारतीय अस्पतालों के लिए रेफर करते हैं. भारतीय डॉक्टर पाकिस्तान में मेडिकल शिविर भी लगाते हैं.

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