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भारत माता और मातृभूमि शब्द यूरोप की देन है

नई दिल्ली:भारत माता की जय नारे पर जारीया राजनीतिक संघर्ष के दौरान प्रमुख इतिहासकार इरफान हबीब ने कहा कि भारत माता ‘का सिद्धांत दरअसल यूरोप से लिया गया है और ऐसा कोई सबूत नहीं है कि वाचा प्राचीन या पूर्व में कल्पना पाया जाता था। जवाहर लाल नेहरू यूनीवर्सिटी में बेन चंदा मेमोरियल लेक्चर‌ देते हुए प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा कि प्राचीन भारत या पूर्व में भारत माता की कोई कल्पना नहीं थी जबकि मदरलैंड (मातृभूमि) और फादर लैंड (बाबाए वतन) का नारा यूरोप से निर्यात किया गया है जहां देशभक्ति के लिए यह शब्द इस्तेमाल किए जाते थे।

प्रोफेसर इरफान का ये बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा और उसकी वैचारिक स्वामी आरएसएस राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए भारत माता की जय नारा बुलंद करने का आग्रह कर रही है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा में एम आई एम के विधायक वारिस पठान को भारत माता की जय नारा न कहने पर निलंबित कर दिया गया है और इस मामले में शिवसेना और भाजपा को कांग्रेस का समर्थन भी हासिल था।

मेमोरियल लेक्चर‌ के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए प्रोफेसर इरफान हबीब ने अपने बयान समझाया कि शब्द ‘भारत’ का उल्लेख प्राचीन भारत में मिलता है। इस शब्द का पहला प्रयोग प्रकृति में राजा  खादर वेला ने किया था लेकिन प्राचीन भारत या पूर्व में देश को मनुष्य के रूप में माँ या पिता में पुकारने का कोई रिवाज नहीं था। कल्पना दरअसल राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए यूरोप में बनाया गया।

जिसका उल्लेख ब्रिटेन और रूस में किया जाता था। उन्होंने बताया कि उर्दू में मातृभूमि जो यूरोप के सिद्धांत से उधार लिया गया। प्रोफेसर इरफान ने कुछ साल पहले संघ परिवार को भटक ​​कर दिया था जब उन्होंने आरएसएस को आईएसओ का दूसरा रुख करार दिया था। इस अवसर पर मेमोरियल लेक्चर‌ के एक और सेट प्रोफेसर आदित्य मुखर्जी ने कहा कि स्वतंत्रता हमारे राष्ट्रीय आंदोलन का मूल सार है। उन्होंने कहा कि गांधी जी का कथन है कि प्रतिक्रिया व्यक्त की स्वतंत्रता को दबाया जा सकता है लेकिन गला घोंटा नहीं जा सकता, और मुझे आशा है कि सरकार इस पर ध्यान देगी।

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