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भारत में दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव को लेकर अमरीकी संस्था का बड़ा खुलासा

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with BJP President Amit Shah at the party's parliamentary board meeting in New Delhi on Monday. PTI Photo by Manvender Vashist(PTI11_9_2015_000190A)

अमेरिका की एक स्वतंत्र संस्था ने दावा किया है कि भारत में वर्ष 2014 के बाद से घृणा, अपराध, सामाजिक बहिष्कार और जबरन धर्मांतरण बढ़ गया है जिससे अल्पसंख्यक समुदायों और दलितों को भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की निगरानी करने वाले अंतरराष्ट्रीय धर्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिकी आयोग की जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों में अपरिभाषित कानूनी, अप्रभावी आपराधिक न्याय तंत्र और विधिशास्त्र में संगति के अभाव के कारण धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों और दलितों ने भेदभाव और उत्पीड़न का सामना किया।
इस संस्था ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा करते हुये अमेरिका से कहा कि वह भारत के साथ व्यापार और कूटनीतिक बातचीत के समय मानवाधिकारों को प्रमुखता दें। ‘भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने संवैधानिक और कानूनी चुनौतियां’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के लेखक इंग्लैंड के बर्मिंघम में इंस्टीट्यूट फार लीडरशिप एंड कम्युनिटी डेवलपमेंट के निदेशक इक्तिदत करामत चीमा हैं।
आयोग के अध्यक्ष थॉमस जे रीज ने कहा, ‘भारत एक ऐसे संविधान के साथ धार्मिक आधार पर विविध और लोकतांत्रिक समाज है जो उसके नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर कानूनी समानता देता है और धर्म के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है। हालांकि असलियत इससे अलग है। भारत की बहुलवादी परंपरा कई राज्यों में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं।’
22 पृष्ठों की इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मई 2014 के चुनावों में भाजपा की जीत के बाद भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है। रिपोर्ट में भारत से आग्रह किया गया है कि वह धर्मांतरण रोधी कानूनों में सुधार करें और यह माने कि बल प्रयोग, धोखे या लालच से कराया गया धर्मांतरण और फिर से धर्म परिवर्तन समान रूप से बुरा है। साथ ही धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों (2007) के लिए आयोग की सिफारिशों को लागू करने का अनुरोध किया गया है।

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