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भिखारियों का भी बैंक है यहां…

गया : बिहार के गया शहर में भिखारियों के एक ग्रुप ने अपना एक बैंक खोल लिया है, जिसे वे ही चलाते हैं और उसका मैनेज भी करते हैं, ताकि मुसीबत के वक्त उन्हें माली सेक्युरिटी मिल सके। गया शहर में मां मंगलागौरी मंदिर के दर पर वहां आने वाले सैक़डों अकीदतमंदो की भीख पर इंहेसार दर्जनों भिखारियों ने इस बैंक को शुरू किया है।

भिखारियों ने इसका नाम मंगला बैंक रखा है। इस अनोखे बैंक के 40 मेम्बरों में से एक राज कुमार मांझी ने कहा, “यह सच है कि हम ने अपने लिए एक बैंक खोला है।” यहां से तकरीबन 100 किलोमीटर दूर गया में मांझी ने कहा, “बैंक मैनेजर, खजांची और सेक्रेटरी के साथ ही एक एजेंट और बैंक चलाने वाले दिगर रुकन सभी भिखारी हैं।”

किस्मत से इस बैंक के मैनेजर मांझी हैं। बैंक के खातों और दिगर काम के इंतेज़ाम के लिए पढ़े लिखे मांझी ने कहा कि, “हम में से हर एक बैंक में हर मंगल के रोज़ 20 रूपये जमा कराते हैं जो 800 रूपये हर हफ्ते जमा हो जाता है।” बैंक के एजेंट विनायक पासवान ने कहा कि उनका काम हर हफ्ते रुकन से पैसे लेकर जमा कराना है।

छह माह पहले कायम बैंक की सेक्रेटरी मालती देवी ने कहा कि, “यह गुजश्ता साल ब़डी उम्मीद के साथ और भिखारियों की तमन्नाओं की तकमील के लिए शुरू किया गया। हमारे साथ अभी तक मआशरे में अच्छा सुलूक नहीं होता, क्योंकि हम गरीबों में भी गरीब हैं।”

भिखारियों से अपना खाता खुलवाने के लिए मालती अब ज्यादा से ज्यादा भिखारियों से राबिता कर रही हैं। उन्होंने कहा, “बैंक के रुकन जो भिखारी हैं, उनके पास न तो बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) और न ही आधार कार्ड है।” मांझी की बीवी नगीना देवी बैंक की खजांची है।

उन्होंने कहा, “”मेरा काम जमा हुए पैसों का लेन-देन करना है।”” मांझी ने कहा कि उनका बैंक इमरजेंसी आने पर भिखारियों की मदद करता है। उन्होंने कहा, “इस माह की शुरूआत में मेरी बेटी और बहन खाना पकाते समय झुलस गई थीं। बैंक ने उनका इलाज कराने के लिए मुझे 8000 रूपये का कर्ज दिया।”

मांझी ने कहा कि यह इस बात की मीसाल है कि उनके जैसे भिखारी को बैंक किस तरह मदद कर सकता है। यह मदद मुल्क के बैंकों में अपनाए जाने वाले अमल , जैसे कागजी काम या जमानतदार के बगैर पूरी होती है। मांझी को एक माह तक इस कर्ज पर ब्याज नहीं देना प़डा। वहीं, मालती ने कहा, “बैंक ने रकम वापसी का दबाव बनाने के लिए कर्ज पर 2 से 5 फीसद सूद कि अदायगी करना लाज़मी किया है।” नाथुन बुद्धा, बसंत मांझी, रीता मसोमात व धौला देवी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके पास अब कम से कम अपना बैंक तो है।

भिखारियों को अपना बैंक शुरू करने के लिए Extremely poor and social welfare state committee के ओहदेदारों ने इसी साल हौसला बढ़ाय‌ था।

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