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भूमि अधिग्रहण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और ७ राज्यो की सरकारों को भेजा नोटिस

पश्चिम बंगाल के सिंगुर ज़िले के किसानो की जीत को ध्यान में रखते हुए देश भर के सभी किसानों को अपने राज्य की सरकारों द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (इसईजेड) के नाम पर छीनी गयी ज़मीनो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के ज़रिये अपनी आवाज़ उठाने का मौका मिल गया है ।

तीन न्यायाधीशों की एक बैंच जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश ज.स.खेहर कर रहे थे, उसने केंद्र और सात राज्यो- तेलंगाना , आंध्र प्रदेश , महाराष्ट्र , कर्नाटक , तमिलनाडु, पशिम बंगाल और पंजाब की सरकारों से पूछा है की सेकड़ो एकड़ कृषि भूमि किसानों और आदिवासियों से ज़बरदस्ती क्यों छीनी गयी है और क्यों उसे निजी रियल एस्टेट डेवेलोपेरो को बाँट दिया गया है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र (इसईजेड) किसान संरक्षण वेलफेयर एसोसिएशन जिसका प्रतिनिधित्व श्रावण कुमार कर रहे थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकारों को यह निर्देश देने के लिए कहा की वे माने की सरकारों द्वारा किसानों की भूमि के हड़पे जाने के कारण किसान गरीबी की तरफ धकेल दिए गए हैं, और यह उनके जीवन, गरिमा और काम करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस देते हुए न्यायलय ने पूछा की सरकारें जवाब दे क्यों न्यायलय विशेष आर्थिक क्षेत्र (इसईजेड) के नियमो के उलंघन और ऋण के पैसे के दुरूपयोग के लिए इन सरकारों के खिलाफ सीबीआई जाँच का आदेश न दे?

किसानों ने कहा की उन्हें अपनी ज़मीने सरकारों, इसईजेड धारक , और निजी डिवेलपरों से वापिस चाहिए ताकि वे उस ज़मीन पर खेती कर पैसे कमा सकें, अपने घर वालो का पेट भर सकें और आगे की पीढ़ियों को पढ़ा सके।

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