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भोजपुर एनकाउंटर मामले में सेवानिवृत्त DSP समेत 4 पुलिस वाले दोषी करार

गाजियाबाद: भोजपुर पुलिस एनकाउंटर मामले में सोमवार को सीबीआई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। तकरीबन 20 साल पहले हुए इस इनकाउंटर पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने सेवानिवृत्त डीएसपी समेत 4 पुलिस वालों को दोषी करार दिया है।

विशेष न्यायाधीश राजेश चौधरी ने इस केस की अंतिम सुनवाई करते हुए सेवानिवृत्त डीएसपी लाल सिंह, दरोगा जोगेन्द्र सिंह, कॉन्स्टेबल सुभाष और सूर्यभान को दोषी पाया। कोर्ट ने दोषियों को सजा सुनाने के लिए 22 फरवरी की तारीख तय की है।

गौरतलब है कि 8 नवंबर 1996 को भोजपुर के मछरी पुलिया के पास पुलिस ने 4 बदमाशों को इनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था। इनकाउंटर की तस्वीरें उसके अगले दिन के अखबारों में छपे। उसके बाद मारे गए लोगों की पहचान पहचान जसवीर, जलालुद्दीन, प्रवेश और अशोक के रूप में हुई। मारे गए सभी मोदीनगर के विजयनगर के रहने वाले थे।

जब इनकाउंटर की जानकारी स्थानीय लोगों को लगी तो उन्होंने हाइवे पर जाम लगा दी। साथ ही उन्होंने मांग किया की इस मामले कीजांच सीबीआई से की जाए। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी मागों को मानते हुए केस सीबीआई के हवाले करने का फैसला किया। 7 अप्रैल 1997 को केस सीबीआई के हवाले कर दिया गया।

सीबीआई ने जांच के आधार पर मुठभेड़ को फर्जी मानते हुए भोजपुर के तत्कालीन डीएसपी लाल सिंह, दरोगा जोगेंद्र सिंह, कॉन्स्टेबल सूर्यभान, सुभाष और रणवीर सिंह को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट फाइल कर दिया। उसके बाद 10 जुलाई 2001 को चार्जशीट सीबीआई कोर्ट में पेश की गई जिसके बाद कोर्ट ने 23 जून 2005 को संज्ञान लिया।

इसके बाद गवाहों के बयान पर 14 सितंबर 2007 को सीबीआई कोर्ट के तत्कालीन जज रमा जैन ने आईपीएस अफसर ज्योति बैलूर को केस में सह-आरोपी बनाया। वह उस वक्त मोदीनगर की अडिशनल एसपी (सर्कल ऑफिसर) थीं। इसके बाद सीबीआई की जांच में यह बात भी सामने आई कि ज्योति बैलूर को इस मामले की पूरी जानकारी थी।

वहीं, एनकाउंटर में बैलूर की पिस्टल से भी गोली चलाए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद वो केस की सुनवाई के दौरान एक दिन भी अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। उसके बाद वो उत्तराखंड में तबादला होने के बाद नौकरी छोड़कर परिवार समेत इंग्लैंड चली गईं। कोर्ट ने उनके खिलाफ कई बार गैर-जमानती वॉरंट जारी कर चुकी है। अब ज्योति बैलूर के खिलाफ 10 मार्च को सुनवाई होगी।

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