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भोपाल एनकाउंटर: चश्मदीद का दावा कैदियों के पास हथियार भी नहीं थे, पुलिस ने उनको घेर भी लिया था फिर एनकाउंटर क्यों किया

भोपाल के पास ईंटखेड़ी में जेल से फरार कैदियों का एनकाउंटर के फर्जी करार देने वालों कि लिस्ट बढ़ती ही जा रही है. खेजड़ा देव गांव के सरपंच जो कि इस घटना के चश्मदीद हैं इस घटना पर बड़े ही तार्किक ढंग से सवाल उठा रहे हैं.
खेजड़ा देव पंचायत के सरपंच मोहन सिंह मीणा ने ANI को बताया,

‘मेरा नाम मोहन सिंह मीणा. सरपंच हूं खेजड़ा देव पंचायत का. तो मेरे पास सुबह पुलिस आई. 6-7 बजे. के…आतंकवादी 8 अपने भोपाल जेल से भागे हुए हैं तो आपका क्षेत्र है तो अपने आस-पास फोन लगा दो. संग्दिध आदमी कहीं पे दिखे तो शक के आधार पर आप पुलिस को मदद करो. मैंने फोन लगाया. फिर टीवी पर देखा. न्यूज़ पर चल रहा था. पास के गांव के ये जीतन भैया हैं. इनसे कहा. इन्होंने बताया कि 4-5 लोग देखे तो हैं. निकल के गए हैं आपके उधर. तो इनने कहा इनका रिटर्न फोन आएगा. फिर इन्होंने कहा दिखे तो हैं संदिग्ध लोग हैं. पानी फेरने वालों को दिखे हैं.खेत में जो पानी फेर रहे थे. पाइप लगा रहे थे.’

‘फिर मेरा दोस्त है सूरज सिंह. मैंने कहा यार इधर 8 आदमी… आतंकी भागे हुए हैं खतरनाक हैं. उन्होंने मर्डर भी किया है खूंखार हैं. आप अपनी गाड़ी लेकर आईए. अपन इधर देखकर आते हैं. इधर की सूचना लगी है. हम आए. आ ही रहे थे. नदी में से एक निकला पहले. हमने सोचा होगा कोई. पुलिस वाला होगा. सादी वर्दी में पुलिस उन्हें ही ढूंढती फिर रही होगी नदी नदी. फिर दूसरा निकला, फिर तीसरा निकला, फिर चौथा निकला. फिर पांचवां निकला.’

‘हमें शक हो गया. फिर छठा निकला. हमने जबी के जबी पुलिस को फोन कर दिया. हमने उनको आवाज भी दी. रोका. मगर उनकी भाषा में कुछ अपन को समझ में नहीं आई. कोई दूसरी भाषा बोल रहे थे.’
रिपोर्टर पूछता है आपने उन्हें कहां रोकने की कोशिश की? मोहन सिंह ने इशारा करते हुए कहा, वो नदी के सामने. एक बंदा पानी फेर रहा था वहां पर. मैंने कहा तू गांव जा और गांव से जाके आदमी लेके आ. 100-50 जित्ते भी हो. हम इनका पीछा कर रहे हैं. हम पीछा करते करते डेढ़ किलोमीटर तक यहां तक लाएं हैं इनको. इनके हाथों में सभी के लाठी थी. कपड़े टंगे थे पीठ पे. फिर ये आन के पठार पे चढ़ गए. हमने फिर रोकने की कोशिश की. कहने लगे गोली मार देंगे अगर करीब आए तो. फिर ये यहां आनके बैठ गए जहां इनका एनकाउंटर हुआ. पुलिस 25-30 मिनट में आई. सवा नौ, या आठ बजे का किस्सा है ये. गाड़ी नहीं देखी थी. डेढ़ किलोमीटर तक यहां तक आए फिर पुलिस आ गई पुलिस ने चेतावनी दी. सरेंडर कर दो. नारा कर रहे थे. नारा लगा रहे थे. उनकी भाषा में अपन को कुछ समझ नहीं आता कि क्या नारा लगा रहे थे. पुलिस को उन्होंने इतना मजबूर कर दिया कि उनका एनकाउंटर करना पड़ा. पहले हवाई फायर किए 10-15. तो वो नहीं आए. सीना ठोकते रहे. जय बोलते रहे.

रिपोर्टर: तकरीबन ये एनकाउंटर कितने देर तक चला होगा.
मोहन सिंह: ये कोई 25-30 मिनट. 30 मिनट.
रिपोर्टर: जब पुलिस ने सरेंडरकरने को बोला तो उनकी तरफ से क्या कार्रवाई थी.
मोहन सिंह: पथराव कर रहे थे.
रिपोर्टर: ऊपर चट्टान पे से?
मोहन सिंह: हां, उन्होंने पत्थर जमा कर लिए थे. पुलिस नीचे थी. और ऊपर से जो पुलिस ने डेरा डाला उन्होंने एनकाउंटर किया. तीन जगह से इनको घेरा गया था. और हम ग्रामीण. जो 4-5 गांव आस-पास लगते हैं सब आ गए थे धीरे धीरे. वो… उनके अंदर इतना खौफ नहीं था. मरने का या मारने का.
रिपोर्टर: ये कौन सी पहाड़ी कहलाती है?
मोहन सिंह: ये मनी खेड़ी पठार कहलाती है. खेगड़ा देव से लगी हुई है.
रिपोर्टर: यहां लोग बहुत खुश नजर आ रहे हैं. जिंदाबाद के नारे और आतंकी मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं.
मोहन सिंह: असल दिवाली तो आज ही मनी है. आज अपने देश के दुश्मन मारे गए हैं.

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