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भोपाल एनकाउंटर: शिवराज सरकार चश्मदीद को चुप कराने के लिए दे रही है पैसों का लालच?

भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल सेंट्रल जेल से कथित तौर पर फरार सिमी कैदियों के फर्जी एनकाउंटर होने से देश भर में बहस जारी है, इस बीच एनकाउंटर घटना के चश्मदीद के लिए राज्य सरकार के घोषित लाखों रुपये के पुरस्कार उनको चुप कराने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा शासक शिवराज सिंह सरकार ने अचारपूरा के 5 गवाहों को चालीस लाख रुपये बतौर पुरस्कार देने की घोषणा की है। शिवराज सिंह सरकार की इस घोषणा पर चौतरफा आलोचना का सिलसिला शुरू हो गया है।

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बीबीसी से बात करते हुए ज्ञान सिंह ने बताया कि हम पांच लोग जिन्होंने पुलिस को फोन कर फरार सिमी क़ैदियों की सुचना दी थी इट्केरी थाणे से फोन आया कि आप लोग सम्मान के लिए चुने गए हैं आप को सरकार ने बुलाया है हम उनके साथ गए उन्होंने बताया कि फरार क़ैदियों के ऊपर 40 लाख का इनाम है जो रक़म हम पंचों को मिलेगा.
लेकिन समाचार पोर्टल फर्स्ट पोस्ट कॉम के अनुसार, स्थानीय नेताओं ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि चश्मदीद को इस मामले पर कुछ ज्यादा न बोलने के लिए उन्हें यह भारी- भरकम रकम दी जा रही है। नेताओं का कहना है कि चालीस लाख की राशि देकर एक ओर जहां सरकार चश्मदीद के मुंह बंद कर देना चाहती है वहीं सरकार की इस प्रक्रिया से एनकाउंटर घटना की जांच भी प्रभावित होगी।
राज्य सरकार के एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि ” मुख्यमंत्री ने एनकाउंटर के दौरान पुलिस की मदद करने वाले लोगों के लिए इस पुरस्कार की घोषणा की है। पुरस्कार की यह राशि उन लोगों में बराबर बराबर वितरित की जाएगी। ‘
हालांकि स्थानीय नेता सरकार के इस बयान से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जेल तोड़े जाने से संबंधित जांच की कार्रवाई जब अभी शुरू ही नहीं हुई, इससे पहले पुरस्कार की घोषणा करना गलत है और यह जांच कार्य को प्रभावित करना है।
ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरिफ मसूद कहते हैं कि शिवराज सिंह ने जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से पुरस्कार की घोषणा की है। ताकि चश्मदीद इस घटना पर चुप्पी साध लें और फिर वह संभावित मुश्किल स्थिति से खुद को बचा लें।
भोपाल के एक और नेता मोहम्मद माहिर कहते हैं कि गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास है। सिमी के कैदी सशस्त्र थे या निहत्थे और इसके अलावा कुछ और बातों को लेकर उनके बीच असंतोष है। इसलिए पुरस्कार की यह राशि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनकी ज़बान बंद करा दिया जाये और अपना उल्लू सीधा कर लिया जाए। माहिर सामाजिक संगठन एमपी मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले अचारपुरा गांव के कुछ लोगों ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा था कि सिमी कैदियों के पास हथियार नहीं थे। गृह मंत्री, आईजी भोपाल और एटीएस प्रमुख सहित राज्य सरकार के अधिकारियों की भी राएँ इस मामले में विरोधाभासी हैं। सिमी कैदी सशस्त्र थे या निहत्थे, इस बाबत उनकी विभिन्न राएँ हैं।
एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि सरकार इस मामले में खुद को बचाने की कोशिश कर रही है क्योंकि वीडियो सहित कई सबूत ऐसे हैं जिनसे एनकाउंटर के बारे में अधिकारियों के दावों की कलई खुल जाती है।

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