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भोपाल गैस अलमिया के मुतासरीन इन्साफ़ से महरूम

भोपाल: एक गैर सरकारी तंज़ीम जो कि भोपाल गैस अलमिया के मुतासरीन के हक़-ओ-इन्साफ़ के लिए जद्द-ओ-जहद कर रही है, ये इंतिबाह दिया कि 3 दिसम्बर को चीफ मिनिस्टर श्यौराज सिंह चौहान की क़ियामगाह का घेराव‌ किया जाएगा ताकि 4 लाख मुतासरीन के लिए मुआवज़े की अदाएगी और अलमिया के क़सूरवारों के ख़िलाफ़ मुक़द्दमात की आजलाना समाअत पर-ज़ोर दिया जा सके।

कन्वीनर भोपाल गैस पेडेट महेला उद्योग संघटन अब्दुल जब्बार ने बताया कि क़बल अज़ीं एक लाख मुतासरीन को मुआवज़ा अदा किया गया लेकिन मुतासरीन की तादाद 5 लाख तक पहुंच गई है जिसकी तसदीक़ मर्कज़ी हुकूमत के आदाद-ओ-शुमार से होती है और इस ख़ुसूस में 2 दरख़्वास्तें अदालत में दाख़िल कर दी गई हैं।

उन्होंने बताया कि इन मुक़द्दमात की आजलाना यकसूई के लिए रियासती हुकूमत को मदाख़िलत करनी चाहिए , एक अर्ज़ी मर्कज़ी हुकूमत से मुताल्लिक़ है, दूसरी अर्ज़ी 4 लाख मुतासरीन को मुआवज़े की अदाएगी से मुताल्लिक़ है जबकि भोपाल गैस अलमीया दुनिया के बदतरीन सनाती हादिसात में शुमार किया जाता है।

उन्होंने कहा कि रियासती हुकूमत की बे-हिसी और बे अमली की वजह से 3 दिसम्बर को चीफ मिनिस्टर की क़ियाम गाह का घेराव‌ करने का फैसला किया गया है। मिस्टर अब्दुल जब्बार ने बताया कि अलमिया के 25 साल बाद जून 2010 में एक ज़ीरीं अदालत के फैसले पर बी जे पी की ज़ेरे क़ियादत हुकूमत ने एक फास्ट ट्रैक अदालत के क़ियाम का ऐलान किया था जबकि पेशरू यू पी ए हुकूमत और इस वक़्त की रियासती हुकूमत और गैर सरकारी तनज़ीमों ने इस फैसले को बहुत ही छोटा और इंतेहाई ताख़ीर से ताबीर किया था।

भोपाल में 3 दिसम्बर 1984 को पेश आए गैस इख़राज वाक़िये में 8 अफ़राद को क़सूरवार पाया गया और उन्हे सिर्फ 2 साल की सज़ाए कैद दी गई थी।

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