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भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले अॉफिसर को मिला जीरो रेटिंग

नई दिल्ली। केंद्र सरकार और उसके मुखिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार से लड़ने के बेशक लाख दावे करते हों लेकिन सरकार के कई फैसले उसकी मंशा पर सवाल खड़े कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला है भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाकर आम जनता के हीरो बने और मैग्ससे अवार्ड विजेता आईएफएस (भारतीय वन सेवा) अधिकारी के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का, जिस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

मामला जुड़ा है आईएफएस अधिकारी और एम्स में चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) रहे संजीव चतुर्वेदी से, जो फिलहाल अपने मूल कैडर हरियाणा में तैनात हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार एम्स में तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी महिम के कारण देशभर में चर्चित हुए संजीव चतुर्वेदी को केंद्र सरकार ने सालाना अप्रेजल में जीरो रेटिंग दी है।

खास बात ये है कि यह रेटिंग जिस अवधि के कार्यकाल के लिए दी गई है उस दौरान एम्स में अपने काम को लेकर चतुर्वेदी काफी चर्चित रहे थे। हालांकि चतुर्वेदी की सक्रियता उनके आला अधिकारियों को रास नहीं आई इसलिए उन्हें किनारे कर दिया गया।

साल 2015 में एम्स के उप सचिव रहे चतुर्वेदी ने इसकी शिकायत सुप्रीम कोर्ट में भी की थी। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सरकार जानबूझकर उन्हें कोई काम नहीं दे रही है, सरकार की मंशा उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से दूर रखने की है।

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