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मइय्यत दफन करने पर फिरका वाराना काशीदगी

डंडारी थाना हल्का के तहत बिशनपुर गाँव में मैयत दफन करने से रोके जाने के बाद पूरे इलाक़े में फिरका वाराना काशीदगी पैदा हो गयी। हालांकि पुलिस और अवामी नुमाइंदों की मुदाखिलत के बाद हालत को क़ाबू में किया गाया है। बताया जाता है की बिशनप

डंडारी थाना हल्का के तहत बिशनपुर गाँव में मैयत दफन करने से रोके जाने के बाद पूरे इलाक़े में फिरका वाराना काशीदगी पैदा हो गयी। हालांकि पुलिस और अवामी नुमाइंदों की मुदाखिलत के बाद हालत को क़ाबू में किया गाया है। बताया जाता है की बिशनपुर बाशिंदा मोहम्मद उलफत का लड़का मोहम्मद इदरीश का इंतेकाल होने के बाद जुमेरात के रोज़ मैयत को बेगैर चहार दीवारी वाले कब्रिस्तान में दफन करने के लिए क़ब्र खोदे जा रहे थे। उसी दरमियान सदानंद पुर बाशिंदा रमानन्द सिंह और उनके हामियों ने क़ब्र खोदने से रोक दिया और ज़मीन खुद की बताने लगे, जिसके बाद दोनों फिरका के दरमियान काशीदगी पैदा हो गयी। जैसे ही थाना पुलिस के साथ बीडीओ और सीओ इजाफ़ी दस्ता के साथ बिशनपुर गाँव पहुंचे, वहीं बलिया से भी इजाफ़ी पुलिस पहुंची।

इस दरमियान मुसलमान मैयत को इसी जगह दफन करने की ज़िद करने लगे, वहीं हिन्दू तबका के लोग दफन नहीं करने पर आड़े रहे। बाद में मुक़ामी इंतेजामिया और अवामी नुमाइंदों की मुदाखिलत के बाद मुस्लिम तबके के लोगों को समझा बुझा कर दूसरी जगह पर मैयत दफन करने के लिए तैयार कर लिया। बताया जाता है की मुक़ामी इंतेजामिया ने दोनों फिरका के दानिश्वरों को जमा जुमा के रोज़ थाना में तलब किया है। इधर मुस्लिम तबका के लोगों का कहना है की जहां पर क़ब्र खोदी जा रही थी, वहाँ 10 बरसों से मैयत को दफन किया जा रहा है। लेकिन आज मजकुरह मुकाम पर क़ब्र खोदे जाने से रोक दिया गया है। गौर तलब हो की बिशनपुर कब्रिस्तान की घेराबंदी भी नहीं हुयी है। जिसकी वजह से इस तरह की वकीय पेश हुयी है।

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