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मक्का और मदीने में गैर मुस्लिमों को जाना क्यों मना है?

मकका पहुंचने के लिए अहम शहर जेद्दाह है। यह शहर एक बंदरगाह भी है और अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग का अहम सेंटर भी। जेद्दाह से मक्का जाने वाले रास्ते पर ये हिदायत लिखे होते हैं कि यहां मुसलमानों के इलावा किसी भी और मजहब का कोई सख्श दाखिल नहीं कर सकता। ज्यादार सूचनाएं अरबी ज़ुबान में लिखी होती हैं, जिसे अन्य देशों के लोग बहुत कम जानते हैं !

अब तक इन इत्तिलाअत में यह भी लिखा जाता था कि “काफिरों’ का दाखिल पर प्रतिबंधित है। लेकिन इस बार “काफिर’ शब्द के जगह पर “नन मुस्लिम’ यानी गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, लिखा था। ईसाई, यहूदी, पारसी और बौद्ध भी उस वर्जित क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते !

यह सच है कि कानूनी तौर पर मक्का और मदीना शरीफ़ के पाक शहरों में ग़ैर मुस्लिमों को दाखिल होने की इजाजत नहीं है। अब हम जाने की कोशिश करते हैं आखिर ऐसा क्यों? जैसे सभी नागरिकों को कन्टोन्मेंट एरिया (सैनिक छावनी) में जाने की इजाजत नहीं होती वैसे ही हर मुल्क में कुछ न कुछ ऐेसे इलाक़े जरूर होते हैं जहाँ सामान्य जनता को जाने की इजाज़त नहीं होती। सैनिक छावनी में केवल वही लोग जा सकते हैं जो सेना अथवा प्रतिरक्षा विभाग से जुदे हों। इसी प्रकार इस्लाम के दो नगर मक्का और मदीना किसी सैनिक छावनी के समान महत्वपूर्ण और पवित्र हैं, इन नगरों में प्रवेश करने का उन्हें ही अधिकार है जो इस्लाम में विश्वास रखते हो !

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जब कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की यात्रा करता है तो उसे सर्वप्रथम उस देश में प्रवेश करने का अनुमति पत्र प्राप्त करना पड़ता है। प्रत्येक देश के अपने कानून होते हैं जो उनकी ज़रूरत और व्यवस्था के अनुसार होते हैं तथा उन्हीं के अनुसार वीसा जारी किया जाता है। जब तक उस देश के कानून की सभी शर्तों को पूरा न कर दिया जाए उस देश के राजनयिक कर्मचारी वीसा जारी नहीं करते।

वीसा जारी करने के मामले में अमरीका अत्यंत कठोर देश है, विशेष रूप से तीसरी दुनिया के नागरिकों को वीसा देने के बारे में, अमरीकी आवर्जन कानून की कड़ी शर्तें हैं जिन्हें अमरीका जाने के इच्छुक को पूरा करना होता है ! जैसे सिंगापुर के इमैग्रेशन फ़ार्म पर लिखा होता है ‘‘नशे की वस्तुएँ स्मगल करने वाले को मृत्युदण्ड दिया जायेगा।’’ यदि मैं सिंगापुर जाना चाहूँ तो मुझे वहाँ के कानून का पालन करना होगा। मैं यह नहीं कह सकता कि उनके देश में मृत्युदण्ड का निर्दयतापूर्ण और क्रूर प्रावधान क्यों है। मुझे तो केवल उसी अवस्था में वहाँ जाने की अनुमति मिलेगी जब उस देश के कानून की सभी शर्तों के पालन का इकष्रार करूंगा।

मक्का और मदीना का वीसा अथवा वहाँ प्रवेश करने की बुनियादी शर्त यह है कि मुख से ‘‘ला इलाहा इल्लल्लाहु, मुहम्मदुर्रसूलल्लाहि’’ (कोई ईश्वर नहीं, सिवाय अल्लाह के (और) मुहम्मद (सल्लॉ) अल्लाह के सच्चे सन्देष्टा हैं), कहकर मन से अल्लाह के एकमात्र होने का इकष्रार किया जाए और हज़रत मुहम्मद (सल्लॉ) को अल्लाह का सच्चा रसूल स्वीकार किया जाए !

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