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मक्का मस्जिद-ओ-शाही मस्जिद के अख़राजात के लिए हुसूल बजट में दुश्वारियाँ

हैदराबाद 15 अगस्त हुकूमत की तरफ से तारीख़ी मक्का मस्जिद और शाही मस्जिद के मुलाज़िमीन की तनख़्वाहें और इंतेज़ामी उमोर से मुताल्लिक़ ख़र्च को बजट में शामिल ना करने के सबब महिकमा अक़लियती बहबूद को बजट के हुसूल में दुशवारीयों का सामना है।

बताया जाता हैके जारीया साल बजट में हुकूमत ने मन्सूबा जाती और ग़ैर मन्सूबा जाती मसारिफ़ में मक्का मस्जिद और शाही मस्जिद के अख़राजात को शामिल नहीं किया जिसके सबब मुलाज़िमीन को कई माह तक तनख़्वाहों से महरूम रहना पड़ा।

डायरेक्टर अक़लियती बहबूद मुहम्मद जलालुद्दीन अकबर ने दोनों मसाजिद के मुलाज़िमीन की तनख़्वाहें और उसरे इंतेज़ामी उमोर की तकमील के लिए महिकमा को 2 करोड़ 85लाख की इजराई के लिए तजावीज़ रवाना की हैं।

दोनों मसाजिद के मुलाज़िमीन की तादाद 30 है जिनकी तनख़्वाहों पर माहाना एक लाख 77हज़ार 520 रुपये का ख़र्च आता है। इस तरह सालाना ख़र्च 21लाख 30हज़ार 240 रुपये होगा।

मक्का मस्जिद में सेक्रियुटी पर तायिनात 25होम गारडज़ की तनख़्वाहों पर सालाना 37लाख 95हज़ार रुपये का तख़मीना किया गया है। दोनों मसाजिद के बर्क़ी चार्जस के लिए सालाना 8 लाख 40 हज़ार रुपये की इजराई की सिफ़ारिश की गई। टेलीफ़ोन चार्जस के तौर पर 18 हज़ार रुपये का तख़मीना किया गया। इस तरह तनख़्वाहों और बर्क़ी-ओ-टेलीफ़ोन के लिए जुमला 67लाख 83हज़ार 240रुपये का बजट तैयार किया गया।

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