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मक्का मस्जिद के ख़तीब और इमाम के लिए मौज़ूं शख़्सियत का अदम तक़र्रुर

तारीख़ी मक्का मस्जिद में सितंबर 2013 से मुस्तक़िल ख़तीब का तक़र्रुर नहीं है जिस के बाइस इमाम मक्का मस्जिद मौलाना हाफ़िज़ रिज़वान क़ुरैशी आरिज़ी तौर पर ख़तीब और इमाम की ज़ाइद ज़िम्मेदारी अदा कर रहे हैं।

तारीख़ी मक्का मस्जिद में सितंबर 2013 से मुस्तक़िल ख़तीब का तक़र्रुर नहीं है जिस के बाइस इमाम मक्का मस्जिद मौलाना हाफ़िज़ रिज़वान क़ुरैशी आरिज़ी तौर पर ख़तीब और इमाम की ज़ाइद ज़िम्मेदारी अदा कर रहे हैं।

मक्का मस्जिद में ख़तीब के तक़र्रुर के मसअले पर गुज़िश्ता एक बरस के दौरान हुकूमत से मुतअद्दिद मर्तबा सहाफ़ती गोशों की जानिब से नुमाइंदगी के बावजूद इस अहम ज़िम्मेदारी पर मुस्तक़िल तक़र्रुर के मुताल्लिक़ बरती जाने वाली लापरवाही से ऐसा महसूस होता हैकि सरकारी मह्कमाजात को मक्का मस्जिद के ख़तीब और इमाम के ओहदा पर किसी मौज़ूं शख़्सियत की तक़र्रुरी में कोई दिलचस्पी नहीं है।

हज़रत अल्लामा मौलाना हाफ़िज़ अबदुल्लाह क़ुरैशी साबिक़ ख़तीब और इमाम मक्का मस्जिद ने सितंबर 2013 में अपनी ज़िम्मेदारीयों से सुबुकदोशी का एलान करते हुए हुकूमत और अर्बाब मजाज़ से इस बात की अपील की थी कि वो ख़तीब और इमाम के अहम ओहदा पर मौज़ूं शख़्स के इंतिख़ाब को यक़ीनी बनाएं और उन की नासाज़ी सेहत के बाइस मौलाना हाफ़िज़ रिज़वान क़ुरैशी बेहतर अंदाज़ में ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं, उन्हें मुस्तक़िल तौर पर मुक़र्रर किया जाये।

मौलाना की इस अपील के बावजूद ताहाल इस मसअले को हल नहीं किया गया बल्कि नमाज़े जुमा के मौक़ा पर मौलाना हाफ़िज़ रिज़वान क़ुरैशी बदस्तूर अपनी ज़ाइद ज़िम्मेदारीयों को अंजाम दे रहे हैं।

हुकूमत बिलख़ुसूस महकमा अक़लीयती बहबूद को चाहीए कि वो फ़ौरी तौर पर इस सिलसिले में इक़दामात का आग़ाज़ करते हुए मुस्तक़िल ख़तीब और इमाम के तक़र्रुर के अहकामात के साथ साथ मख़लूवा जायदादों पर तक़र्रुरात के अहकामात जारी करें ताकि माह रमज़ानुल मुबारक के दौरान अवाम को किसी किस्म की मुश्किलात का सामना ना करना पड़े।

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