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मछली कमान और गुलज़ार हौज़ की तारीख़ी इमारत ख़तरे में!

हिंदुस्तान में हैदराबाद की पत्थर गट्टी का शुमार क़दीम और तामीर की शाहकार मार्किटों में होता है। पत्थर गट्टी की क़दीम तसावीर को देखने से अंदाज़ा होता है कि हमारे मुल्क में शायद इतनी ख़ूबसूरत मार्किट कोई हो।

हिंदुस्तान में हैदराबाद की पत्थर गट्टी का शुमार क़दीम और तामीर की शाहकार मार्किटों में होता है। पत्थर गट्टी की क़दीम तसावीर को देखने से अंदाज़ा होता है कि हमारे मुल्क में शायद इतनी ख़ूबसूरत मार्किट कोई हो।
1907 में तामीर कर्दा इस मार्किट की कमानें, सतून, रौशनदान ग़रज़ मार्किट के दरो दीवार सब कुछ देखने से ताल्लुक़ रखते हैं अगर्चे इस मार्किट को दुकानात के जंगल ने छिपा दिया है।

इस के बावजूद सय्याहों की नज़र इस तारीख़ी इमारत पर पड़ ही जाती है जिसे देख कर वो हैदराबाद दक्कन की ख़ुशहाली का तसव्वुर करने लगते हैं। क़ारईन! क़ुतुब शाही हुक्मरानों ने हैदराबाद को बसाया।

उसे मस्जिदों मीनारों और बाग़ात से सजाया संवारा, जब कि आसिफ़ जाहि हुक्मरानों ने क़ुतुब शाही हुक्मरानों के लगाए गए इस पौदे की पूरी तनदही से आबयारी करते हुए उसे ना सिर्फ़ एक मज़बूत दरख़्त में तब्दील किया बल्कि इस के अतराफ़ कई ख़ूबसूरत महलात और पत्थर गट्टी जैसी इमारतें तामीर करते हुए उसे तारीख़ी इमारतों के हसीन बाग़ में तब्दील कर दिया।

जहां तक पत्थर गट्टी का सवाल है पत्थर गट्टी के ज़िक्र के साथ ही लोग कृष्णा टॉकीज़ का हवाला देते हैं हालाँकि ये टॉकीज़ पत्थर गट्टी की तामीर के 53 साल बाद वजूद में आई। कुछ दही क़ब्ल तक भी ये शहर और मज़ाफ़ाती इलाक़ों की वाहिद टॉकीज़ थी जहां सिनेमा बीनों का हुजूम रहा करता था। लेकिन आप को ये जान कर हैरत होगी कि अब इस कृष्णा टॉकीज़ को उस के मालिकीन ने फ़रोख़त कर दिया है।

बावसूक़ ज़राए का कहना है कि इस तारीख़ी इमारत यानी पत्थर गट्टी और मछली कमान और गुलज़ार हौज़ के दरमियानी हिस्सा में वाक़े जायदाद को शहर के एक रियल स्टेट ताजिर ने खरीदा और हस्बे आदत उसे दूसरे फ़रीक़ को फ़रोख़त कर दिया। और अब वहां रातों के औक़ात में कमर्शियल काम्प्लेक्स की तामीर के लिए खुदाई जा रही है। ज़राए का ये भी कहना है कि नए मालिकीन ने इस टॉकीज़ की मलगियात के किराया दारों को बता दिया है कि उन लोगों ने मलगियात समेत सारी इमारत खरीद ली है।

जब कि मलगियात के किरायादार बड़ी बेफ़िकरी से अपने कारोबार में मसरूफ़ हैं। अतराफ़ और अकनाफ़ के लोगों का कहना है कि ये किरायादार इस लिए बेफ़िकर हैं क्यों कि वो लोग 60 ता 80 बर्सों से उन मलगियात में कारोबार कर रहे हैं। इस जायदाद की खरीदी के बारे में ज़राए का ये भी कहना है कि कृष्णा टॉकीज़ किसी रईस की जायदाद थी।

उस की खरीदारी करने वाला रियल स्टेट ताजिर शहर में कई स्कूल्स और पैट्रोल पंप्स भी चलाता है। हर कमान की ऊंचाई 60 फ़ुट और चौड़ाई 36 फ़ुट है। जब कि चारसू का हौज़,

और फिर गुलज़ार हौज़ कहलाने वाले तारीख़ी हौज़ को इन कमानों का मर्कज़ कहा जाता है और इसी के बाज़ू कृष्णा टॉकीज़ वाक़े है जहां अब मुबैयना तौर पर तामीर का सिलसिला जारी है। बहरहाल बल्दिया और महकमा आसार क़दीमा किया इक़दमात करते हैं इस बारे में बहुत जल्द सब को मालूम हो जाएगा।

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