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मजलिस ने पुराने शहर को सूदखोरों के हवाले करदीया: मुहम्मद अली शब्बीर

हैदराबाद 11 जनवरी:कांग्रेस ने पुराने शहर में मजलिस के साथ अब तक किए गए “दोस़्ताना मुक़ाबलें- को “ग़लती‘‘ क़रार देते हुए इस बात का एतराफ़ क्या कि मजलिस के सबब कांग्रेस ने पुराने शहर पर तवज्जा नहीं दे सकी और मजलिस पर पूरा भरोसा करते हुए ये ख़्याल क्या जाता रहा कि शहर मजलसी नुमाइनदे तरक़्की देंगे लेकिन कांग्रेस की ये सोच ग़लत साबित हुई। क़ाइद अपोज़ीशन तेलंगाना क़ानून साज़ कौंसिल मुहम्मद अली शब्बीर ने पुराने शहर में  चुनाव रैली से ख़िताब के दौरान इस बात का एतराफ़ क्या।

उन्होंने इस मौके पर कहा कि मजलिस से मुफ़ाहमत कांग्रेस ने पुराने शहर की तरफ़ तवज्जा नहीं दे सकी जिस के नतीजे में पुराने शहर को आज मजलिस ने सूदखोरों और गुंडा अनासर के हवाले करदीया है। उन्होंने बताया कि मजलसी क़यादत आज ये कह रही है कि शहर को कांग्रेस क़ातिलों के हवाले करना चाहती है लेकिन जो लोग ये कह रहे हैं वो ख़ुद पुराने शहर को सूद खोरों के हवाले किरचके हैं।

मुहम्मद अली शब्बीर ने बताया कि जो लोग कांग्रेस पर इल्ज़ाम आइद कररहे हैं वो दरहक़ीक़त एक रुकने असेंबली पर किए गए हमले के ख़िलाफ़ ना सिर्फ एक ख़ानदान, एक क़बीला बल्कि एक तबक़ा को हरासां करने के बराबर बन रहे हैं। जिस नौजवान ने हमला क्या था इस की मौत जाए वाक़िये पर ही होचुकी थी लेकिन इस के बाद एक ख़ानदान को मुसलसिल हरासानी मुनासिब नहीं है।

उन्होंने बताया कि दीन और मज़हब के नाम पर वोट हासिल करने वालों को चाहिऐ कि वो अमल भी वैसा ही करे और अल्लाह के रसूलؐ(स०) ने जो तालीमात दी हैं, इन के मुताबिक अल्लाह  माफ़ करने वालें को पसंद करता है। जो लोग दीन इस्लाम के नाम पर वोट मांग रहे हैं, उन्हें कम अज़ कम इस तालीम को नज़र में रखते हुए अमली पैग़ाम देना चाहिए था।

क़ाइद अपोज़ीशन तेलंगाना क़ानून साज़ कौंसिल ने बताया कि अकबर ओवैसी पर हमले के ख़िलाफ़ 40 से ज़ायद एहतेजाजी जलसे मुनअक़द करने वाले आलेर में हुए फ़र्ज़ी  एनकाउंटर के ख़िलाफ़ ख़ामोश तमाशाई बने रहे और तशकील करदा एस आई टी पर ख़ामोशी इख़्तयार किए हुए हैं। उन्होंने किशनबाग़ फायरिंग वाक़िये के मुतालिक आवाज़ ना उठाने पर भी मजलिस को तनक़ीद का निशाना बनाया और कहा कि मेहदीपट्नम में 12 साला शेख़ मुसतफ़ा को नज़रआतिश किए जाने के वाक़िये पर भी मजलिस की तरफ से कोई आवाज़ नहीं उठाई गई।

मुहम्मद अली शब्बीर ने मरहूम सदर मजलिस सुल्तान सलाहुद्दीन  ओवैसी को क़ौम का हमदर्द क़रार देते हुए कहा कि इन के विरसा सालारे मिल्लत की हक़ीक़ी पालिसी से इनहिराफ़ किरचके हैं और 12% मुस्लिम तहफ़्फुज़ात के सिलसिले में के सी आर के वादे पर भी मजलसी क़यादत  ख़ामोश है।

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