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मणिपुर: मुस्लिम नौजवानों की बेरहमी से हत्या

असहिष्णुता और सांप्रदायिकता को आप चाहे कितना भी नकार लें परंतु इनकी मौजूदगी का एहसास समय समय पर होने वाली घृणित घटनाएँ करा ही देती हैं. सांप्रदायिकता का ज़हर तेज़ी से उत्तर पूर्व के राज्यों जैसे असम और मणिपुर में भी फैल रहा है. तीन मुसलमान युवकों को बड़ी निर्दयता से मायांग, इम्फाल में पीटा गया.

बृहस्पतिवार को 4.30 बजे शाम, तीन मणिपुरी मुसलमान युवकों को मायांग इम्फाल यांग्बी गार्ड्न में बेरहमी से पीटा गया. दहला देने वाली ये घटना उस समय हुई जब ये नौजवान गार्डेन से बाहर आए. इनमें से दो युवकों की मौत हो गयी और एक सौभाग्य से ज़िंदा बच गया परंतु बुरी तरह घायल है. मृत लड़कों के नाम मो. सद्दाम वल्द मो. बसीरूद्दीन और मो. फ़ारूक़ वल्द मो. बदरुद्दीन हैं जो लिलोंग कलेइखोंग से थे. दोनो की उम्र 23 और 22 वर्ष थी.

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तीसरा लड़का मो. ज़ाबिर 19 वर्षीय, वल्द अब्दुल हकीम लिलोंग अवांग लेयकैई से है और बुरी तरह घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है. तीनों विद्यार्थी हैं.

इससे पहले 25 मार्च को 6 मणिपुरी मुस्लिम लड़कों पर बेरहमी से हमला हुआ था. ये घटना इरम सिफाई में हुई थी.

इन घटनाओं के बाद मणिपुरी मुसलमानों में असुरक्षा की भावना ने घर कर लिया है.

मीडीया, राइट्स ग्रूप्स ने 25 मार्च की घटना को नज़रअंदाज़ किया और सरकार के कोई कदम ना उठाने से सांप्रदायिक ताकतों को बल मिला.

मुख्य मंत्री और स्थानीय विधायक ने एक शब्द भी नहीं कहा इन घटनाओं को लेकर और ना ही कोई कार्यवाही हुई अभियुक्तों के खिलाफ.

राष्ट्रीय मीडीया वैसे भी उत्तर पूर्व की समस्याओं को नज़रअंदाज़ करता है और गुनहगार खुले आम घूमते हैं.

पिछले बीस सालों में भारतीय मुसलमानों को जीवन के हर पहलू में अभूतपूर्व तौर पे हाशिए पर धकेला गया है. मई 1993 के दंगों के बाद मणिपुरी मुसलमानों ने हर तरह का अभाव, भेदभाव और उपेक्षा झेली है.

साभार: dainiksurya.

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