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मतगणना के सिस्टम पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार में विवाद

नई दिल्ली। मतों की बूथवार गिनती की वर्तमान प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच मतभेद की स्थिति है। चुनाव आयोग इस व्यवस्था को वोटों की गिनती समूह में करने के नियम से बदलना चाहता है जिससे वोटरों की गोपनीयता बरकरार रखी जा सके, जिससे चुनाव के बाद राजनीतिक दल वोटरों को परेशान न कर सकें।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो बूथवार मतगणना के खिलाफ था और इस मामले में संशोधन करने के लिए केंद्र सरकार से कहा था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को ये कहकर अस्वीकार कर दिया कि वोटों की गिनती की वर्तमान व्यवस्था ज्यादा फायदेमंद है।

जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम खानविलकर और जस्टिस शांतनगौधर की पीठ के सामने चुनाव आयोग की ओर से एडवोकेट अशोक देसाई ने बात रखी। उन्होंने कहा कि मतगणना की वर्तमान प्रणाली से राजनीतिक पार्टियों को ये पता चल जाता है कि किस इलाके के वोटरों ने उन्हें वोट दिए हैं और किस इलाकों के नहीं।

केंद्र सरकार की तरफ से एडवोकेट नलिन चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था से राजनीतिक पार्टियों को ये पता चलेगा कि उन्होंने किस इलाके में बेहतर प्रदर्शन किया है। जहां उनका बेहतर प्रदर्शन नहीं होगा वहां वो अच्छा प्रदर्शन करने के लिए मेहनत करेंगे।

उन्होंने कहा कि जहां तक वोटरों को डराने या धमकाने की बात आती है। जागरुक मीडिया के दौर में लोगों को डराने-धमकाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की बात से संतुष्ट दिखी और कहा कि मतगणना की वर्तमान स्थिति में बदलाव होना चाहिए।

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