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मन की बात: यह दिवाली सुरक्षा बलों के नाम पर समर्पित हो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 25वीं मन की बात करते हुए देश के लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सबको दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं पूरी दुनिया में दीपावली मनाई जाती है। वेद-काल से आज तक भारत में जो उत्सवों की परम्परा रही है, वे समयानुकूल परिवर्तन वाले उत्सव रहे हैं। हमारा हर पर्व शिक्षादायक होता है, दीपावली का पर्व ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’- अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने का सन्देश देता है।

मोदी ने कहा कि मेरे दिल-दिमाग में विश्व सुरक्षा बलों के जवानों की त्याग, तपस्या, परिश्रम छाया रहता है। यह दिवाली सुरक्षा बलों के नाम पर समर्पित हो। मैंने देशवासियों को ‘संदेश टू सोल्जर’अभियान के लिए निमंत्रित करता हूं। मेरे प्यारे देशवासियों! सेना के जवान सिर्फ सीमा पर ही नहीं, जिंदगी के हर मोड़ पर राष्ट्र भावना से प्रेरित होकर करते हैं।

उन्होंने कहा कि Narendra modi app और My Gov में भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा है। स्‍वस्‍थ भारत का संदेश देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश खुले में शौच से मुक्‍त हो गया है। पहले सिक्किम प्रान्त हुआ था, अब हिमाचल हुआ, नवम्बर को केरल भी होने जा रहा है। मैं हरियाणा प्रदेश का भी अभिनन्दन करना चाहता हूँ जिसने प्रदेश को किरोसिन मुक्त करने का बिड़ा उठाया।

मोदी ने कहा कि आईटीबीपी जवान विकास ठाकुर ने खुले में शौच के कलंक को मिटाने का बिड़ा उठाया। सिर्फ दुश्मनों पर गोलियां चलाने के लिए वो देशसेवा करता है, ऐसा नहीं है। उसने अपने चेकबुक से 57,000 रुपए निकाले और अपने पंचायत प्रधान को दे दिया और कहा कि इससे जिन 57 घरों में शौचालय नहीं बना है, बना दीजिए। विकास ठाकुर ने 57 परिवारों को एक-एक हज़ार रूपए अपनी जेब से देकर स्वच्छता अभियान को ताकत दी है। तभी हिमाचल प्रदेश खुले में शौच से मुक्ति हो पाया।

उन्होंने कहा कि मैं केरल में नौजवानों का भी आभार व्यक्त करता हूं। केरल में एनसीसी के कैडेट, एनएसएस के लोग, इंजीनियरिंग के छात्रों ने मिलकर के तय किया कि वे शौचालय बनाएंगे। शौचालय बनाने के लिए उन नौजवानों ने अपने कंधे पर मोदी ने कहा कि वैसा ही केरल में नौजवानों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं. केरल में एनसीसी के कैडेट, एनएसएस के लोग, इंजीनियरिंग के छात्र, सबने मिलकर के तय किया कि हम शौचालय बनाएंगे. शौचालय बनाने के लिए अपने कंधे पर ईंट, सीमेंट जैसे सारे सामान उठा करकर पूरा दिन भर पैदल चलकर जंगलों में गए और जनजातीय पंचायत इडमालाकुड़ी में शौचालय बनाया। इस तरह नौजवानों ने दूर-सुदूर जंगलों में जाकर खुले में शौच से मुक्‍त किया।

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