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मन घड़त कहानीयों पर रद्द-ए-अमल क्यों ज़ाहिर करूं : जनरल वी के सिंह

फ़ौजी सरबराह जनरल वी के सिंह ने आज उन रिपोर्टस को ग़लत क़रार दिया और उसे मीडीया की ज़हनी इख़तिरा से ताबीर करते हुए उसे झूट का पलंदा कहा जहां उन पर इल्ज़ाम आइद किया गया था कि अहम फ़ोन काल्स की समाअत के लिए उन्होंने अपने बाएतिमाद साथीयों

फ़ौजी सरबराह जनरल वी के सिंह ने आज उन रिपोर्टस को ग़लत क़रार दिया और उसे मीडीया की ज़हनी इख़तिरा से ताबीर करते हुए उसे झूट का पलंदा कहा जहां उन पर इल्ज़ाम आइद किया गया था कि अहम फ़ोन काल्स की समाअत के लिए उन्होंने अपने बाएतिमाद साथीयों को ताय्युनात किया था।

एक किताब की रस्म इजराई के मौक़ा पर अख़बारी नुमाइंदों से ख़िताब करते हुए उन्हों ने कहा कि जो बात सदाक़त से ताल्लुक़ नहीं रखती, इस पर अपना रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करने से क्या फ़ायदा। अगर कुछ लोग मन घड़त कहानियां बनाते हैं और मीडीया के अरकान उसे शाय करने में भी दिलचस्पी दिखाते हैं तो फिर बताइये ऐसी झूटी बातों पर अपना रद्द-ए-अमल क्यों ज़ाहिर करूं।

याद रहे कि हुकूमत को एक नामालूम शिकायत मौसूल हुई है जिस में जनरल वी के सिंह पर मुतअद्दिद इल्ज़ामात आइद किए गए हैं जिस में फ़ोन काल्स की समाअत के लिए बाएतेमाद अफ़राद की ताय्युनाती भी शामिल है ताकि उनके मुतनाज़ा उम्र के मुआमले पर अहम अश्ख़ास की बातचीत किसी नौईयत की है, इसकी तफ्सीलात हासिल की जा सकें ताकि ये मालूम हो सके कि हुकूमत की हिक्मत-ए-अमली किया है।

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