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मयारी हिफ़्ज़ान-ए-सेहत निज़ाम गरीबों और अमीरों दोनों केलिए यकसाँ होना ज़रूरी : सदर जमहूरीया

तिब्बी खर्च की वजह से हर साल चार करोड़ लोगों के गरीबी ज़दा हो जाने का चर्चा करते हुए सदर जमहूरीया प्रणब‌ मुकर्जी ने आज एक आला मयारी क़ौमी हिफ़्ज़ान-ए-सेहत निज़ाम गरीबों और अमीरों दोनों केलिए एक‌ तौर पर क़ायम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ।

तिब्बी खर्च की वजह से हर साल चार करोड़ लोगों के गरीबी ज़दा हो जाने का चर्चा करते हुए सदर जमहूरीया प्रणब‌ मुकर्जी ने आज एक आला मयारी क़ौमी हिफ़्ज़ान-ए-सेहत निज़ाम गरीबों और अमीरों दोनों केलिए एक‌ तौर पर क़ायम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ।

उन्हों ने हिफ़्ज़ान-ए-सेहत और तिब्बी खर्च की वजह से गरीबी ज़दा लोगो पर इस के असर और इस सिलसिले में समाज के मख़दूश(मिलावट) तबक़ात का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये बात नाक़ाबिल-ए-क़बूल है कि तकरीबन 80 फीसद आमदनी हिफ़्ज़ान-ए-सेहत केलिए ख़र्च होजाती है।

उन्हों ने इस बात पर सदमा पहुंचने का इज़हार किया कि हर साल चार करोड़ हिंदूस्तानी ईलाज के अख़राजात की वजह से गरीबी का शिकार होजाते हैं। उन्हों ने ज़ोर दे कर कहा कि गरीबों की हिफ़्ज़ान-ए-सेहत ख़िदमात नाक़िस नहीं होनी चाहिऐं। गरीबों और अमीरों दोनों केलिए मयारी क़ौमी हिफ़्ज़ान-ए-सेहत निज़ाम का क़ियाम बहुत ज़रूरी है।

सदर जमहूरीया हिंद प्रणब‌ मुकर्जी ने कहा कि सैकूलर जमहूरीया हिंदूस्तान में ग़रीब और अमीर के दरमयान हिफ़्ज़ान-ए-सेहत के एतबार से कोई फर्क नहीं इस्तेमाल करना चाहिए।

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