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मराहटी फिल्मों के ख़िलाफ़ शोभा डे के रिमार्कस पर तनाज़ा

मुंबई: अंग्रेज़ी मुसन्निफ़ा शोभा डे को तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए शिवसेना ने आज उनकी क़ियामगाह पर एहतेजाजी मुज़ाहरा किया और इल्ज़ाम आइद किया कि उन्होंने थिएटरों में मराहटी फिल्मों की नुमाइश को लाज़िमी क़रार देने से मुताल्लिक़ हुकूम

मुंबई: अंग्रेज़ी मुसन्निफ़ा शोभा डे को तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए शिवसेना ने आज उनकी क़ियामगाह पर एहतेजाजी मुज़ाहरा किया और इल्ज़ाम आइद किया कि उन्होंने थिएटरों में मराहटी फिल्मों की नुमाइश को लाज़िमी क़रार देने से मुताल्लिक़ हुकूमत के फ़ैसले की मुख़ालिफ़त करके महाराष्ट्रा की तहज़ीब की तौहीन की है जबकि थिएटरों में प्राइम टाइम (फ़रस्ट शो । सेकंड ) के दौरान मराहटी फिल्में दिखाने के ख़िलाफ़ उन के तबसरे पर तनाज़ा पैदा होगया है।

शिवसेना के एहतेजाज को नजरअंदाज़ करते हुए शोभा डे ने कहा कि उन की हिफ़ाज़त से मुताल्लिक़ मुंबई पुलिस पर मुकम्मल एतेमाद है। इलाक़ा कैफे परेड में वाक़्य शोभा डे की क़ियामगाह के रूबरू एहतेजाजी करते हुए। उन के हाथों में वडा पाव‌ और दही मीसल की छोटी छोटी कुशीयाँ थीं क्योंकि शोभा डे ने अपने ट्वीटर पर ये तंज़ किया था कि सिनेमा घरों में अब पॉप कॉर्न की बजाय मराहटी ज़ाइक़े दस्तियाब होंगे।

इस तबसरे पर शदीद रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए सीनियर शिवसेना लीडर संजय रावत ने कहा कि कोई भी मराहटी बाशिंदा इस तरह के रिमार्कस बर्दाश्त नहीं करसकता और ये तबसरा मराहटी कल्चर की तौहीन है। हम आज शाम तक उन्हें वडापाव‌ और दही मीसल (Dahi Misal) का मज़ा चखा कर रहेंगे।

उन्होंने सवाल किया कि अगर तुम्हें मराहटी सिनेमा और कल्चर पसंद नहीं है तो फिर यहां क़ियाम पज़ीर क्यों हैं। शिवसेना ने कहा कि अगर तुम महाराष्ट्र में क़ियाम पज़ीर हो अपने आप को महाराष्ट्रियन क़रार देती हैं लेकिन मराहटी फिल्मों के ख़िलाफ़ बोलती हो। उन्हों ने कहा कि मेरे ख़्याल में इस तरह के लोग अपने आप को महाराष्ट्रियन कहलाने के क़ाबिल नहीं है।

तुम यहां क्यों रहती हो। तुम कहीं और चले जाओ और अपना पेज थ्री कल्चर शुरू करो। ताहम शोभा डे अपने तबसरे पर अटल है और कहा कि शिवसेना की धमकीयों से ख़ौफ़ज़दा नहीं है क्योंकि तमाम गोशों से मेरी ताईद की जा रही है। मैं पुर‌एतेमाद और पुरअज़म हूँ जो भी होगा देखा जाएगा।

शिवसेना की हलीफ़ बी जे पी ने इस तनाज़े से लाताल्लुक़ी का इज़हार किया है और कहा कि हुकूमत की ये ज़िम्मेदारी है कि मराहटी कल्चर का तहफ़्फ़ुज़ किया जाये और शोभा डे को भी एहतेजाज का हक़ है। पार्टी ने शिवसेना के एहतेजाज को एहमीयत देने से भी गुरेज़ किया है।

बी जे पी तर्जुमान GVL नरसिम्हा राव‌ ने कहा कि किसी सियासी जमात के एहतेजाज को धमकी आमेज़ तसव्वुर नहीं किया जाना चाहिए। शिवसेना तर्जुमान सामना में भी एक सख़्त गीर ईदारिया तहरीर किया गया जिस में शोभा डे पर शख़्सी तन्क़ीदें की गई और ये सवाल किया गया है कि शोभा डे ने रियासती हुकूमत के फ़ैसले को दादागिरी से ताबीर किया है तो फिर छत्रपति शिवा जी और बालासाहब ठाकरे ने अपने दौर में दादागीरी नहीं की थी? तुम्हारे (शोभा) आबा-ओ-अज्दाद और उनके बच्चे पाकिस्तान में पैदा नहीं हुए थे और तुम बुर्क़ा पहन कर पेच थ्री की पार्टीयों में शिरकत नहीं करेगी? शोभा डे की क़ियामगाह पर जैसे ही एहतेजाजी ईख़्ट्टा हुए पुलिस ने क़ियामगाह की हिसारबंदी करदी जिस पर उन्होंने मुंबई पुलिस से इज़हार-ए-तशक्कुर किया।

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