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मर्सी बेपनाह इख़्तयारात के साथ नए फ़िरऔन–ए-मिस्र

मिस्री सदर मुहम्मद मर्सी ने अपने इख़्तयारात में इज़ाफ़ा करने से मुताल्लिक़ नया फ़रमान जारी करके एक तनाज़े को जन्म दे दिया है।सदर के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हिज़ब-ए-इख़्तलाफ़ ने एहतिजाज का ऐलान किया है।

मिस्री सदर मुहम्मद मर्सी ने अपने इख़्तयारात में इज़ाफ़ा करने से मुताल्लिक़ नया फ़रमान जारी करके एक तनाज़े को जन्म दे दिया है।सदर के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हिज़ब-ए-इख़्तलाफ़ ने एहतिजाज का ऐलान किया है।

फ़रमान के मुताबिक़ अब कोई भी उन के बनाए हुए क़वानीन, फ़ैसलों और जारी किए गए फ़रमान को चैलेंज नहीं कर सकेगा और नई पार्लीमान की तशकील तक सदर मर्सी के तमाम फ़ैसलों के ख़िलाफ़ कोई अपील नहीं की जा सकती।सदर ने दस्तूर साज़ असेंबली को आईन की तशकील के लिए मज़ीद दो माह की मोहलत दे दी है।

क़ाहिरा यूनीवर्सिटी में सियासी उलूम के प्रोफ़ैसर मुस्तफ़ा कमाल अलसीद ने कहा है कि सदर के ये फ़ैसले मिस्र की सियासत में अदमे इअतिमाद बढ़ा देंगे और इक़तिसादी बहाली के लिए साज़गार माहौल के क़ियाम को मुतास्सिर करेंगे,

जबकि आज़ाद ख़्याल सियासत दां मुहम्मद अलबरादई ने कहा है कि मर्सी ने तमाम ममलिकती इख़्तयारात पर क़बज़ा करके ख़ुद को मिस्र का नया फ़िरऔन बना लिया है इस से क़बल सदर मर्सी ने 13 अक्तूबर को प्रॉसिक्यूटर जनरल को बरतरफ़ करके फ़ैसला वापस लिया था।

सदर मर्सी और प्रॉसिक्यूटर जनरल महमूद के दरमयान इस मुआमले पर मुज़ाकरात कामयाब होने के बाद उन की बरतरफ़ी का फ़ैसला वापिस लिया गया था।

इस से पहले सदर की जानिब से बरतरफ़ी के बावजूद अबद अलमजीद महमूद ने ओहदा छोड़ने से इनकार कर दिया था और वो जजों और वुकला के हमराह दफ़्तर गए थे।

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