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मलाला के बहाने बच्चों को स्कूल पहुंचाने की कोशिश

पाकिस्तान ने ऐलान किया है कि मुल्क के 30 लाख गरीब घरानो के बच्चे अगर स्कूल जाते हैं तो नगद राशि रकम उनकी मदद की जाएगी। पाकिस्तान ये ऐलान तब किया जब अक्वाम ए मुत्तहिदा (संयुक्त राष्ट्र) ने पाकिस्तान में तालिबान की गोली का निशाना बनीं 1

पाकिस्तान ने ऐलान किया है कि मुल्क के 30 लाख गरीब घरानो के बच्चे अगर स्कूल जाते हैं तो नगद राशि रकम उनकी मदद की जाएगी। पाकिस्तान ये ऐलान तब किया जब अक्वाम ए मुत्तहिदा (संयुक्त राष्ट्र) ने पाकिस्तान में तालिबान की गोली का निशाना बनीं 15 साला मलाला यूसुफजई के नाम पर ‘मलाला डे’ मनाया है।

आलमी बैंक और बरतानिया से माली मदद हासिल इस मुहिम के तहत कहा गया है कि पाकिस्तान के ऐसे गरीब घरानो के बच्चों को स्कूल जाने वाले पर फी ( प्रति) बच्चे के हिसाब से हर महीने दो डॉलर दिए जाएंगे।

पाकिस्तान ने इस मौके पर जिस प्रोग्राम का ऐलान किया है, उसे वसीला-ए-तालीम नाम दिया गया है।

पाकिस्तान के सदर आसिफ अली जरदारी और आलमी तालीम के लिए अक्वाम ए मुत्तहिदा (संयुक्त राष्ट्र) के खुसूसी दूत गॉर्डन ब्राउन ने राजधानी इस्लामाबाद में इसका ऐलान किया।

साल 2009 में मलाला ने बीबीसी उर्दू के नाम एक गुमनाम डायरी लिखी थी जिसमें उन्होंने अपने इलाके की तमाम लड़कियों के स्कूल जाने पर लगी तालिबान की पाबंदी और दूसरे हालात का बयान किया था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अगले चार सालो में मुल्क के लाखों गरीब बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना इस प्रोग्राम का मकसद है और प्राथमिक स्कूल जाने वाले ऐसे हर बच्चे के परिवार को हर महीने दो डॉलर नगद रकम दी जाएगी।

ये रकम हुकूमत के ‘बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम’ के तहत बांटी जाएगी जिसे जरूरतमंद परिवारों की छोटी-मोटी माली मदद के इरादे से बनाया गया था।

इस बीच दुनियाभर में लाखों लोगों ने उस ‘ऑनलाइन-पेटीशन’ पर दस्तखत किए हैं जिसमें मलाला यूसुफजई को शांति के लिए नोबेल इनाम देने की मांग की गई है।

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