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मस्जिदों और मदरसों के कार्यक्रमों में भी देशवासियों को आमंत्रित किया जाए: जमीअत उलेमा बंगाल

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिकता फैलाने के अभियान का मुकाबला करने के लिए पश्चिम बंगाल जमीअत उलेमा ने राज्य भर में आंदोलन चलाने की घोषणा करते हुए मसाजिद के इमामों और मदरसों के ज़िम्मेदारों से मस्जिदों और मदरसों के दरवाजे देशवासियों के लिए खोलने की अपील करते हुए कहा है कि उनसे सामाजिक संबंध बढ़ाया जाए. इसके लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और चिकित्सा कार्यक्रमों का आयोजन करके अपने यहां आमंत्रित करें ताकि गलत फहमियां दूर हो सके.

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प्रदेश 18 के अनुसार, कोलकाता शहर के महाजती सदन में आयोजित “सांप्रदायिक सद्भाव सम्मेलन” में पश्चिम बंगाल के स्पीकर बीमान बनर्जी ने देश भर में धार्मिक व अभिव्यक्ति की आज़ादी को खत्म करने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 में देश के सभी नागरिकों को अपने धर्म, संस्कृति और रिवाज के पालन की पूरी आजादी दी है. इस आज़ादी को कोई छीन नहीं सकता है. उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सभी देशवासियों को संविधान और इस की आत्मा की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है, और इसके लिए प्रयास करना चाहिए. बीमान बनर्जी ने कहा कि राजनीतिक हितों के लिए युवाओं में सांप्रदायिकता का जहर घोला जा रहा है, इसलिए उसके खिलाफ देश के सभी धर्मनिर्पेक्ष, राष्ट्रवादी और बुद्धिजीवियों को मिलकर संघर्ष करना होगा.
उन्होंने कहा कि जमीअत उलेमा भारत की ऐतिहासिक पार्टी है. उसने देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए जानी व माली कुर्बानी दी है. अब उनहोंने सांप्रदायिकता के खिलाफ जो अभियान शुरू किया है उसका हम स्वागत करते हैं. उन्होंने जमीअत के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी जो ममता बनर्जी मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री भी हैं, कि सराहना करते हुए कहा कि सरकार से लेकर सामाजिक स्तर पर सबसे अच्छा काम कर रहे हैं.
बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कुरान की आयत का अंग्रेजी अनुवाद पढ़ते हुए कहा कि कुरान का संदेश मानवता का संदेश है. कुरान मानवता के कल्याण और बहुमुखी कामयाबी के लिए दुनिया के सामने बेहतरीन रास्ता दिखाया है. दुनिया के सभी धर्मों में भाईचारे,सहिष्णुता और सांप्रदायिक सद्भाव का सन्देश दिया है.

जमीअत उलेमा पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष और ममता बनर्जी की सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र) पुस्तकालय और मास शिक्षा मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लाम अमन व शांति का धर्म है मगर कुछ मानवता विरोधी शक्तियां इस्लाम की छवि बिगाड़ कर देश और विश्व स्तर पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जमीअत उलेमा भारत की वह ऐतिहासिक पार्टी है जिसने सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता का नारा बुलंद किया और स्वतंत्रता आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर हिस्सा लिया. आज़ादी के बाद देश के निर्माण और विकास के लिए जमीअत लगातार प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें देश को नष्ट करने के लिए नफरत फैला रहे हैं. इन का मकसद सत्ता पर कब्जा करना है. भारत जो विभिन्न धर्मों और भाषा बोलने वालों का देश है, इन सब के बीच नफरत की दीवार खड़ी की जा रही है. इस लिए हम ने इस सम्मेलन का आयोजन किया है जिस में सभी धर्मों और समुदाय के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. उन्होंने मस्जिद के इमामों और विद्वानों से अपील कि अपने मोहल्ले में सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करें और इसमें देशवासियों को आमंत्रित करें. इन से बातचीत करें और एक साथ खाएं. उन्होंने कहा कि नफरत का जवाब नफरत से कभी नहीं दिया जा सकता है. हमारे सामने नबी (स.अ.व.स) की पूरी सीरत है. इस समारोह में सांसद व बंगला दैनिक के संपादक अहमद हसन इमरान और आलिया विश्वविद्यालय के गेस्ट प्रोफेसर मौलाना मंजूर अहमद कासमी और अन्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए.

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