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मस्जिद-ए-नबवी में 12 ज़बानों में तिलावते कलाम पाक

रमज़ानुल मुबारक के मुक़द्दस दिन आते ही रौज़-ए-रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम पर हाज़िरी देने वाले आशिक़ाने रसूल की तादाद भी ग़ैर मामूली हद तक बढ़ जाती है और हर तरफ़ माहे सियाम की ईमानी रौनक़ें जल्वा बिखरी होती हैं।

ऐसे ही इंतेज़ामीया की जानिब से हुस्ने इंतेज़ाम का मुज़ाहरा देखने को मिलता है। अलग अलग ज़बानों में क़ुरान-ए-पाक के तराजुम, दीनी और इस्लामी तारीख़ की किताबों से मस्जिद-ए-नबवी की अलमारीयां भर जाती हैं।

इस बार भी मस्जिद की इंतेज़ामीया ने ज़ाइरीन की सहूलत के लिए उर्दू ज़बान समेत 12 ज़बानों में क़ुरान-ए-पाक के तराजुम का एहतिमाम किया है। हर साल के तरह इम साल भी मस्जिद-ए-नबवी में माह-ए-सियाम और आशिक़ान रसूल की आमद ने मक़ाम-ए-मुक़द्दस के रुहानी कैफ़-ओ-मस्ती को चार चांद लगा दिए हैं।

इस पर मुस्तज़ाद मस्जिद-ए-नबवी की इंतेज़ामीया की काबिल-ए-सिताइश मसाई हैं जिसने ज़ाइरीन के लिए सहूलयात मुहय्या करने में कोई कसर बाक़ी नहीं छोड़ी और ये साबित किया है कि रौज़-ए-रसूल के मेज़बान दुनिया भर से आने वाले मेहमानों की ख़िदमत में किस तरह जुटे हुए हैं। जैसे-जैसे रौज़-ए-रसूल पर हाज़िरी देने वालों की तादाद बढ़ती जाती है।

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