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मस्जिद तामीर या मरम्मत में किसी ग़ैर मुस्लिम का पैसा नहीं लग सकता!

अयोध्या : पिछले दिनों सावन मेले के दौरान मंदिर की छत गिरने के बाद हुए हादसे के चलते प्रशासन ने ऐसी जर्जर इमारतों को नोटिस जारी किया है कि या तो उनकी मरम्मत कराई जाए या फिर उन्हें गिरा दिया जाए. आलमगीरी मस्जिद के लिए भी इसी के तहत नोटिस जारी किया गया है.लेकिन हाजी महबूब कहते हैं कि यदि महंत ज्ञानदास वास्तव में हिन्दू मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश करना चाहते हैं तो उन्हें यह ज़मीन और मस्जिद मुसलमानों को सौंप देनी चाहिए. नुमानगढ़ी स्थित आलमगीरी मस्जिद की जर्जर इमारत को महंत ज्ञानदास ने ठीक कराने का फ़ैसला किया और उस पर काम भी शुरू करा दिया. लेकिन कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है. हाजी महबूब का आरोप है कि महंत ज्ञानदास ऐसा सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं और अक़्सर ऐसे काम करते हैं ताकि उन्हें पब्लिसिटी मिलती रहे, लेकिन मस्जिद की मरम्मत या उससे जुड़ा कोई काम करने की मुस्लिम समाज उन्हें इजाज़त नहीं देगा.

बताया जाता है कि 17वीं शताब्दी में इस मस्जिद को मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के किसी सेनापति ने बनवाया था. बाद में अवध के नवाब शुजाउद्दौला ने ये जगह मंदिर बनाने के लिए हनुमानगढ़ी मंदिर ट्रस्ट को दे दी. मस्जिद में लगातार नमाज़ भी होती रही.लेकिन हाल ही में जिला प्रशासन ने कानूनी तौर पर हनुमानगढ़ी ट्रस्ट को इस पूरे परिसर और भवन का स्वामी मानते हुए मस्जिद से सटी जर्जर दीवार को गिरा देने या मरम्मत कराने का नोटिस दिया है. उसी आधार पर मस्जिद के सामने जमीन पर बने चबूतरे और दीवार का निर्माण कार्य कराया जा रहा है.

इस बारे में महंत ज्ञानदास से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. उनके इस प्रयास की तारीफ़ भी हो रही है, लेकिन हाजी महबूब के अलावा ऐसे और भी कई संगठन हैं जो कि महंत ज्ञानदास के इस क़दम का विरोध कर रहे हैं.
बहरहाल मस्जिद से सटी दीवार के जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है. महंत ज्ञानदास बाबरी मस्जिद के अहम पक्षकार हाशिम अंसारी के साथ मंदिर-मस्जिद विवाद का हल ढ़ूूंढने के मामले में भी काफी प्रयास कर चुके हैं.

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