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महंगाई पर क़ाबू पाने हुकूमत के इक़दामात से बेहतरी

इफ़रात-ए-ज़र इतमीनान बख़श, पैदावार बढ़ाने पर ख़ुसूसी तवज्ज़े, फाइनेंस सेक्रेटरी अरविंद मायाराम का बयान

इफ़रात-ए-ज़र इतमीनान बख़श, पैदावार बढ़ाने पर ख़ुसूसी तवज्ज़े, फाइनेंस सेक्रेटरी अरविंद मायाराम का बयान

मुल्क में महंगाई पर क़ाबू पाने हुकूमत के इक़दामात के बाद इफ़रात‍-ए‍‍-ज़ेर की शरह को इतमीनान बख़श क़रार देते हुए फाइनेंस सेक्रेटरी अरविंद मायाराम ने आज कहा कि मुल्क में क़ीमतों की सूरत-ए-हाल मज़ीद बेहतर होगी और महंगाई में कमी वाक़्य होगी। हालिया हुकूमत ने बढ़ती क़ीमतों पर रोक लगादी है।

पैदावार में इज़ाफे पर भी तवज्जे दी जा रही है। ग़िज़ाई अशीया की क़ीमतों में बहुत ज़्यादा इज़ाफ़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि इन अशीया की पैदावार को यक़ीनी बनाने की ज़रूरत है। आने वाले दिनों में ग़िज़ाई अशीया की ख़रीदारी में इज़ाफे से क़ीमतों में भी इज़ाफ़ा होसकता है लिहाज़ा क़ीमतों में इस्तेहकाम लाने के लिए हुकूमत ने इक़दामात किए हैं जिस से इफ़रात‍-ए‍-जज़ेर पर मोस्सर तरीक़ा से क़ाबू करलिया जाएगा। ये पूछे जाने पर कि आया इफ़रात-ए-ज़र में गिरावट का रुजहान मईशत के लिए मुसबत होगा।

मायाराम ने कहा कि बिलाशुबा महंगाई पर क़ाबू पाया जा सकेगा। अब कमी का रुजहान चल रहा है और ये इफ़रात-ए-ज़र भी बतदरीज नीचे जाएगा। मुझे पूरा एतेमाद है कि हुकूमत ने जो इक़दामात किए हैं इस के असरात दिखाई दे रहे हैं। पैदावार को बढ़ाने के लिए हुकूमत कोशिश कररही है तो मईशत में भी सुधार आएगा।

इफ़रात‍-ए‍-ज़ेर की शरह को मज़ीद नीचे जाना है। मार्किट में रीटेल इफ़रात की शरह 3 माह के अंदर सब से कम शरह दर्ज की गई है जो 8.28 फ़ीसद रही। अप्रैल में ये शरह 8.59 फ़ीसद तक पहूंच गई थी। क़ीमतों में कमी से तर्कारीयों, दालों और डाएरी की अशयाइल की क़ीमतें घट गई हैं। मार्किट में क़ीमतों पर क़ाबू पाने के लिए कई एक इक़दामात किए जा रहे हैं।

इस के अलावा फ़ूड प्रोसैसिंग सनअत को भी ज़बरदस्त तक़वियत दी जा रही है। जबकि हिन्दुस्तान उस वक़्त सारी दुनिया में तर्कारीयों और मेवाजात की पैदावार में सब से बड़ा मुल्क है। माया राम ने कहा कि नरेंद्र मोदी हुकूमत तमाम ज़रूरी इक़दामात करते हुए महंगाई पर क़ाबू पाना चाहती है। ज़रई शोबा में भी तवील मुद्दती बरामदाती मार्किट को फ़रोग़ देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है।

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