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महंत ज्ञान दास ने कहा, कारसेवकों ने मस्जिद नहीं, रामलला की मंदिर तोड़ी थी

अयोध्या में हनुमानगढ़ी अखाड़े के महंत ज्ञान दास ने कहा है कि 6 दिसम्बर 1992 को कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद नहीं मंदिर तोड़ी थी। एक न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने विवादित ढांचे को खोलने का आदेश दिया था। उसके बाद से ही वहां रामलला की पूजा हो रही थी।

इसके बाद महंत ज्ञान दास ने कहा कि चूंकि पहले से ही विवादित स्थल पर राम लला की पूजा हो रही थी, इसलिए भाजपा, आरएसएस और विश्व हिन्दू परिसद के कारसेवकों ने मस्जिद का ढांचा नहीं, बल्कि मस्जिद मंदिर को गिराया था। उसके बाद उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहें तो राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा, लेकिन वह इस मामले पर कुछ नहीं बोलते।

ज्ञान दास कहा कि अभी तक तो उनका समर्थन अखिलेश के पक्ष में है। लेकिन अगर प्रधानमंत्री का बयान राम मंदिर पर आता है तो वो फिर से इसके बारे में सोचेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर उन्हें विश्वास है क्योंकि वे एक ठोस नेता हैं।

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