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महान इस्लामिक फ़लसफ़ी अब्दुल्लाह किरमानी ने दिखाया था ‘यूरोप को रास्ता’

File Photo: The passage of light..

इतिहास(हिस्ट्री): अस्सलाम ओ आलेकुम, सिआसत हिंदी में आज हम एक ऐसे स्कॉलर के बारे में आपको बताएँगे जो अपने ज़माने में मशहूर भी था और बाद के ज़मानों ने उससे काफ़ी कुछ सीखा भी, एक ऐसा दौर था जब उनकी बातों को समझ कर आने वाले दौर के स्कॉलर नयी सोच पैदा किया करते थे. किरमान में पैदा हुआ फ़ारसी स्कॉलर अब्दल्लाह अल-किरमानी का जन्म दसवीं शताब्दी के बीच या उसके कुछ साल बाद माना जाता है. वो एक फ़लसफ़ी थे, उनका थीओलोजी पे अध्ययन महत्वपूर्ण रहा है.

उनके बारे में कहा जाता था कि वो इस्माइली फ़लसफ़ीयों की फ़ेहरिस्त में सबसे महत्वपूर्ण थे.

ये माना जाता है कि उन्होंने तक़रीबन ३० किताबें लिखीं जिसमें से सिर्फ़ 18 ही मिल पायी हैं. उनकी किताब राहत-अल-अक्ल १०२० में मुक़म्मल हुई थी, उन्होंने अपनी किताबों के ज़रिये लोगों को ये समझाने की कोशिश की कि किस तरह से शान्ति को पाया जा सकता है,साथ ही उन्होंने ‘कारण’ समझने के ऊपर ज़ोर दिया जो बाद में पुनर्जागरण का एक मुख्य सूत्रधार बना, यही वजह रही कि यूरोप में पुनर्जागरण कामयाब हुआ. ऐसा कहना ग़लत न होगा कि यूरोप को किरमानी और ऐसे दुसरे इस्लामिक वैज्ञानिकों ने एक नया रास्ता दिखाया.
उनकी किताबें इस बारे में भी महत्वपूर्ण हैं कि ये हिंसा को पूरी तरह नकारती थीं और इससे उग्रवादी विचारधारा वाले लोग भी शान्ति कि तरफ आये.

इसके अलावा किताब-अल-रियाद जैसी किताबें लिख कर उन्होंने इस्माइली कोस्मोलोजी के बारे में जानकारी दी.

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