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महाराष्ट्र पुलिस को उर्दू, अरबी के साथ बंगला भी सिखाई जा रही है

मुंबई: महाराष्ट्र पुलिस का दावा है कि आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए उर्दू, अरबी के साथ साथ पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें बंगाली भी सिखाई जा रही है ताकि गोपनीय जानकारी सहित सोशल मीडिया पर जारी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और संदिग्ध गतिविधियों को रोका जाए. महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक श्री सतीश माथुर ने कहा कि हम पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को गुप्त स्थान पर उर्दू और अरबी सिखाने के प्रबंध किए हैं और यहाँ बंगाली भी सिखाई जाती है. यह जगह महाराष्ट्र में स्थित है.

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प्रदेश 18 के अनुसार, पुलिस महानिदेशक श्री सतीश माथुर ने एक प्रसिद्ध अंग्रेजी अखबार से बातचीत करते हुए इस बात का इज़हार किया और कहा कि उर्दू और अरबी भाषाओं को पुलिस वालों को पहले से सिखाया जाता रहा है, लेकिन अब इस सूची में बंगाल को भी शामिल कर लिया गया. जुलाई में पड़ोसी देश के शहर ढाका में एक कैफे में होने वाले हमले के बाद बंगाल को भी शामिल कर लिया गया है.
उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश से हजारों बांग्लादेशी देश में आते हैं और मुंबई सहित महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों में भी बरसरे रौजगार हैं और हम नहीं जानते हैं कि वे आपस में क्या बात कर रहे हैं और यही कारण है कि बंगाला को भी शामिल किया गया है. हाल में उपमहाद्वीप में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि हुई है और बांग्लादेश में भी तेजी से उनकी गतिविधियां जारी हैं. बताया जाता है कि महाराष्ट्र इंटेलिजेंस एकेडमी पूणे ने उर्दू सिखाने के लिए कई पाठ्यक्रम तैयार किए हैं जो राज्य इंटेलिजेंस विभाग से जुड़े अधिकारियों को सिखाई जाती है. राज्यी पुलिस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि एक विशेषज्ञ भाषा को इसके लिए नियुक्त गया है जो उर्दू की शिक्षा देगा.
उन्होंने कहा कि इसका लाभ एटीएस और आतंकवाद से निपटने के लिए सक्रिय अधिकारियों को मिलेगा. एक अधिकारी का दावा है कि उर्दू भाषा की जानकारी के कारण गुप्त विभाग के अधिकारियों ने वेबसाइट और इंटरनेट पर गुमराह होने वाले युवाओं को आईएस के सहायकों के जाल को फैलाने से रोका था.

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