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महिलाएं बौद्धिक रूप से पुरुषों के बराबर नहीं होती कहने वाले पोलैंड के सांसद के बयान पर शुरू हुआ विवाद

वारसॉ: यूरोपीय संसद में पौलेंड के एक सदस्य की औरतों को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद शुरू हो गया है। जानुस कोर्विन मिक्की को कई लोगों ने महिला विरोधी करार दिया है तो कई ने उन्हें अपना मुंह बंद रखने की सलाह दी है।

दरअसल, जानुस कोर्विन मिक्की ने अपने एक बयान में कहा है कि यह 20वीं शताब्दी का एक घिसा-पिटा विचार है कि महिलाएं बौद्धिक रूप से पुरुषों के बराबर होती हैं। इस घिसे-पिटे विचार को खतम करने की जरूर है, क्योंकि यह सही नहीं है।

जानुस ने यह बयान वारसॉ में दिया था लेकिन उससे दो दिन पहले भी उन्होंऩे कुछ विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को पुरषों से कम वेतन मिलना चाहिए क्योंकि वह कमजोर हैं, छोटी और कम मेधावी होती हैं।

गुरुवार को जानुस की बयान के जांच के आदेश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि जानुस के अगर ये बयान पाए गए तो उन्होंने अर्थ दंड या अस्थायी निलंबन का सामना करना पड़ सकता है। सोशल मीडिया गुरेस के इस बयान की काफी आलोचना हो रही है।

वहीं, यूरोपीय संसद में स्पैन की सदस्य इरात्से गार्शिया परेज ने जानुस के इस आपत्तिजनक बयान पर कहा, “आपके इस विचार के मुताबिक तो मुझे भी यहां संसद में खड़े होने का हक नहीं है। मैं जानती हूं कि आप जैसे लोगों को बहुत डर लगता है जब हम महिलाएं यहां इस संसद में बैठकर उसी तरह यूरोपीय लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जैसे कि आप कर रहे हैं।” परेज ने इसके आगे कहा कि मैं यहां यूरोप की सभी महिलाओं का आप जैसे मर्दों से बचाव करने के लिए आई हूं।

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