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महफ़ूज़ रुकमी ज़ख़ाइर की शरह में 0.25 फीसद कमी : आर बी आई का फैसला

क़र्ज़ की शरहों में किसी तरह की कटौती से गुरेज़ । मार्किट में इज़ाफ़ी फ़ंडज़ की दस्तयाबी का इमकान । एस बी आई की जानिब से फैसले का ख़ैर मुक़द्दम मुहतात मौक़िफ़ इख़तियार करते हुए रिज़र्व बैंक औफ़ इंडिया ने आज महफ़ूज़ रुकमी ज़ख़ाइर की शरह ( सी आर आर ) में 0.25 फीसद की कमी करदी है ताहम इस ने इफ़रात-ए-ज़र की शरहों में इज़ाफ़ा को देखते हुए शरह सूद में किसी तरह की कमी से गुरेज़ किया है । रिज़र्व बैंक औफ़ इंडिया ने ये फैसला हुकूमत की जानिब से तरक़्क़ी की रफ़्तार को तेज़ करने केलिए किए गए मुख़्तलिफ़ इक़दामात के बाद किया है ।

कहा गया है कि इस फैसले के नतीजे में मार्किट में 17,000 करोड़ रुपय का सरमाया बाहर आएगा । बैंकों की जानिब से जो रुकमी ज़ख़ाइर महफ़ूज़ रखे जाते हैं उन की शरह में मामूली कमी के नतीजे में एसा होसकता है । आर बी आई का कहना है कि इस रक़म के बहाव के नतीजे में मईशत के पैदावार से मुताल्लिक़ शोबा जात में क्रेडिट की सहूलत दस्तयाब होसकेगी । आज की गई कटौती के नतीजे में महफ़ूज़ रुकमी ज़हाइर की शरह घट कर 4.5 फीसद तक होगई है ।

बैंक ने ताहम शरह सूद में किसी तरह की तबदीली नहीं की है और ना ही दीगर शरहों में कोई रद्द-ओ-बदल किया गया है । बैंक के गवर्नर मिस्टर डी सुबह राव का कहना है कि इफ़रात-ए-ज़र की शरह में इज़ाफ़ा को देखते हुए दीगर शरहों को तब्दील ना करने का फैसला किया गया है । बैंक ने कहा कि चूँकि इफ़रात-ए-ज़र की शरह में इज़ाफ़ा का रुजहान हनूज़ पाया जाऐ है इस लिए बैंक की मानीटरी पॉलीसी में असल तवज्जु इफ़रात-ए-ज़र की शरह पर क़ाबू पाना ही है ।

अगसट के महीने में इफ़रात-ए-ज़र की शरह 7.55 फीसद तक पहूंच गई थी जबकि एक माह क़बल ये शरह 6.87 फीसद थी । आर बी आई ने कहा कि महफ़ूज़ रुकमी ज़ख़ाइर की शरह में जो कमी की गई है इस का इतलाक़ 22 सितंबर से होगा। कहा गया है कि इस शरह में कमी के नतीजे में दीगर बैंकों को अपने क़र्ज़ा जात की शरह पर कमी करने में मदद मिलेगी जिस से सरमाया कारी में इज़ाफ़ा होगा और तरक़्क़ी की शरह बढ़ सकती है ।

रिज़र्व बैंक के इस इक़दाम पर तबसरा करते हुए एस्टेट बैंक औफ़ इंडिया के सदर नशीन प्रतीप चौधरी ने कहा कि बैंक की जानिब से इस की शरहों पर मौजूदा पॉलीसी फैसले के बाद अज़ सर-ए-नौ ग़ौर किया जाएगा। बैंक की वाजिबात कमेटी का इजलास इमकान है कि बहुत जल्द मुनाक़िद होगा जिस में इन शरहों के ताल्लुक़ से ग़ौर किया जाएगा। उन्हों ने कहा कि आर बी आई का ये फैसला एक मुसबत क़दम है और इस इक़दाम से ये इशारा मिला है कि बैंक मईशत में बदलते हुए हालात के मुताबिक़ अपनी पालिसीयों का तीन करता रहेगा।

आर बी आई पॉलीसी जायज़ा में कहा गया है कि सरमाया कारी के मनफ़ी रुजहान की वजह से शरह तरक़्क़ी इंतिहाई कम है । हुकूमत की जानिब से हाल ही में जो इस्लाहात पर मबनी इक़दामात किए गए हैं इस से ताहम सूरत-ए-हाल क़दरे तब्दील होरही है । हुकूमत ने हाल ही में एक सख़्त फैसला करते हुए डीज़ल की शरहों में पाँच रुपय फ़ी लीटर का इज़ाफ़ा किया था । आर बी आई का कहना है कि डीज़ल की कीमत में इज़ाफ़ा और गैस स्पलाई में कटौती से इबतदा-ए-में हालाँकि इफ़रात-ए-ज़र की शरह में इज़ाफ़ा होगा लेकिन इस के नतीजे में मईशत के इस्तिहकाम में मदद मिलेगी और ये एक बहतरीन कामयाबी क़रार दी जा सकती है ।

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