Tuesday , October 24 2017
Home / Crime / माँ अल्लाह को प्यारी हो गई, ज़ालिम-ओ-क़ातिल बाप जेल में

माँ अल्लाह को प्यारी हो गई, ज़ालिम-ओ-क़ातिल बाप जेल में

हैदराबाद। २४ अगस्त (नुमाइंदा ख़ुसूसी) चांद रात को लोग ईद की तैयारीयों में मसरूफ़थी। मुस्लिम मुहल्ला जात में फ़ैशन का माहौल था। मासूम बच्चे एक दूसरे को अपने नए कपड़े जूते चप्पलें वग़ैरा दिखा कर ख़ुशी का इज़हार कररहे थी। मासूम लड़

हैदराबाद। २४ अगस्त (नुमाइंदा ख़ुसूसी) चांद रात को लोग ईद की तैयारीयों में मसरूफ़थी। मुस्लिम मुहल्ला जात में फ़ैशन का माहौल था। मासूम बच्चे एक दूसरे को अपने नए कपड़े जूते चप्पलें वग़ैरा दिखा कर ख़ुशी का इज़हार कररहे थी। मासूम लड़कीयां औरख़वातीन अपने हाथों पर मेहंदी के डिज़ाइन दिलवा रही थीं।

इन के चेहरों से ईद की ख़ुशीयांअयाँ थी। इन के हँसने खिलखिलाने की आवाज़ों से माहौल में ख़ुशीयां ही ख़ुशीयां बिखर गई थीं। ऐसा ही कुछ 28 साला साजिदा बेगम के घर में भी होरहा था। इन की 5 साला बेटीज़ेबा , 12 साला बेटी नेहा और 9 साला बेटे अबदुर्रहमान और अबदुर्रहीम भी ख़ुशीयों का इज़हार कर रहे थी।

ये मासूम फ़र्त मुसर्रत से अपनी माँ की पेशानी को चूमते हुए नाना नानी की जानिब से भेजे गए कपड़ों को बार बार दिखा रहे थे जबकि नेहा और ज़ेबा कुछ ही देर पहले अपनी माँ और ख़ाला के साथ क़रीब में जाकर मेहंदी के डिज़ाइन से भरपूर बाग़ों को दिखाते हुए ख़ुशी का इज़हार कररहे थे और ग़रीब माँ साजिदा बेगम अपने बच्चों की ख़ुशीयों को देख कर ख़ुशी से फूले नहीं समा रही थीं। वो दिल ही दिल में अल्लाह का शुक्र अदा कर रही थीं कि इस ने अपने बच्चों के साथ ग़ुर्बत के बावजूद हँसने मुस्कराने का मौक़ा फ़राहम किया ही, लेकिन साजिदा बेगम और इस ग़रीब के बच्चों को इस बात का पता ही नहीं था कि इन की मुस्कुराहट-ओ-ख़ुशीयां बहुत जल्द आंसूओ और ग़मों में तबदील होने वाले हैं।

साजिदा बेगम को इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि इस का ज़ालिम शौहर ही उसे क़तल करदेगा और बच्चों से माँ की ममता छीन लेगा। बहरहाल अल्लाह को जोमंज़ूर था वही हुआ और रात देर गए जबकि लोग ईद की तैयारीयों में मसरूफ़ थी, साजिदा बेगम के घर में गूंजने वाले क़हक़हे अचानक बंद होगए क्योंकि इस के ज़ालिम-ओ-बख़ील शौहर मुहम्मद अबदालख़लील ने ना सिर्फ अपनी बीवी को ज़ालमा-ओ-बहीमाना अंदाज़ में क़तल करदिया बल्कि पोलीयो से मुतास्सिर अपने 9 साला मासूम बेटे अबदुर्रहमान का गला दबा कर उस की ज़िंदगी का चिराग़ गुल करदिया। इस बख़ील ज़ालिम-ओ-जाबिर और शैतान सिफ़त 40 साला मुहम्मद अबदालख़लील ने सिर्फ और सिर्फ इस लिए अपनी नेकसिफ़त उस बीवी और बेटे का क़तल किया क्योंकि साजिदा बेगम का मेहंदी लगा कर आना इस से बर्दाश्त ना होसका हालाँकि साजिदा बेगम अपनी दो बहनों और बेटी के हमराह ज़ालिम शौहर से इजाज़त लेकर ही मेहंदी लगवाने गई थी। ताहम उसे पता चला कि मेहंदी साजिदा बेगम ने अपने पैसों से लगाई है तो वो कंजूस आपे से बाहर होगया और इस मसला पर इस ने अपनी बीवी और माज़ूर बेटे का गला घूँट कर क़तल कर दिया।

साजिदा बेगम को तक़रीबन 30 मिनट तक मुंह पर तकिया रख कर क़तल करने के बाद भी ख़लीलने बड़े ही ज़ालिमाना अंदाज़ में चाक़ू से इस का गला भी काट दिया। इस ज़ालिम ने इस पर इकतिफ़ा-ए-ही नहीं किया बल्कि ये सारा मंज़र देख रहे मफ़रूर बेटे अबदुर्रहमान के भी मुंह पर तकिया रखते हुए 15 मिनट तक दबाये रखा और मासूम-ओ-माज़ूर बच्चा अपने शैतानसिफ़त बाप के हाथों शहीद होगया। इस वक़्त यक़ीनन वो सोच रहा था होगा कि अल्लाह ने मुझे इस कमज़र्फ़ ज़ालिम और शैतान सिफ़त बाप के हाँ क्यों पैदा किया? अल्लाह जिसे रखे उसे कौन चखे के मिस्दाक़ दरिन्दा सिफ़त ख़लील की नज़र 9 साला बेटी ज़ेबा पर नहीं पड़ी वर्ना वो उसे भी क़तल करदेता। ये मासूम बच्ची अपनी माँ के क़तल का सारा मंज़र देखती और बाद में चीख़-ओ-पुकार करने की बजाय इस ने मारे ख़ौफ़ के अपना मुंह ओढ़नी में छा लिया।

बाप बीवी और बेटे को क़तल करने के बाद उस की जानिब बढ़ने की कोशिश भी की लेकिन हर बार अल्लाह अज़्ज़-ओ-जल ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया और बाद में इस केज़हन में ये ख़्याल भी नहीं रहा कि इस की मासूम बेटी ने भी ये दर्दनाक-ओ-उल-मनाकमंज़र देखा ही। 12 साला नेहा और इस का भाई अबदुर्रहीम चूँकि अपनी नानी और दादी के पास गए हुए थी, इस लिए बाप के हाथों क़तल होने से बच गए वर्ना इन का क्या हाल होता अल्लाह ही बेहतर जानता ही। राक़िम उल-हरूफ़ ने 9 साला ज़ेबा और 12 साला नेहा से बातचीत की ये लड़कीयां बाप के ज़ुलम प्यारी माँ और भाई के क़तल की उल-मनाक दास्तान सुनाते हुए ज़ार-ओ-क़तार रो रही थीं। ज़ेबा और नेहा बार बार ये कहती कि हमें हमारी अम्मी चाआई।

अम्मी के बिना हम नहीं रह सकती। इन मासूम बच्चीयों के येअलफ़ाज़ सुन कर वहां मौजूद हर किसी की आँखों से आँसू रवां थी। ये लड़कीयां बार बार कह रही थीं हमें चूमने वाली हमें प्यार करनेवाली और हमारे साथ खेलने वाली हमारी अम्मी को वापिस लाॶ। उन के दर्दनाक अलफ़ाज़ से सारी फ़िज़ा-ए-मग़्मूम होगई थी। छोटी बेटीज़ेबा ने बताया कि वो सुबह तक अपनी बाप की शैतानी हरकतों को देखती रही और मौक़ा मिलते ही वहां से क़रीब में वाक़्य नानी के मकान पहूंच कर बताया कि अम्मी को ख़ून निकल रहा ही। जब साजिदा के वालदैन और दीगर रिश्तेदारों ने वहां पहूंच कर देखा तो साजिदा और अबदुर्रहमान की नाशें पड़ी हुई थीं और साजिदा बेगम ख़ून में लत पत् थी।

दरिंदगी का मुज़ाहरा करने वाले ख़लील ने रोने का ड्रामा शुरू करदिया और काफ़ी देर यही कहता रहा कि किसी ने साजिदा और अबदुर्रहमान का क़तल करदिया ही। ज़ालिम घंटों ज़ार-ओ-क़तार रोता रहा। बाद में इन्सपैक्टर पहाड़ी शरीफ़ गिरी कुमार कलकोटा ने उसे गिरफ़्तार करते हुए पूछताछ की, जिस पर पता चला कि क़ातिल ख़लील हैं। बताया जाता हीका मुहम्मद नगर इला कनटा का रहने वाला मुहम्मद अबदालख़लील तालाब कटा भवानी नगर में पान की एक दुकान में काम किया करता था, जहां से उसे यौमिया 120 रुपय मिल जाते थी।

TOPPOPULARRECENT