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मांगने वाले को मत झीड्को

साइलों से बरअफ़रोख़्ता (नाराज‌) वो होता हे, जिस को अप्ने सरमाया के ख़त्म हो जाने या कम हो जाने का अंदेशा हो। जब आप के रब ने आप को ग़नी कर दिया हे तो ये खज़ाने कभी ख़त्म‌ होने वाले नहीं। फिर आप किसी साइल को क्यों झिड़कें या साइलों की कसरत से तं

साइलों से बरअफ़रोख़्ता (नाराज‌) वो होता हे, जिस को अप्ने सरमाया के ख़त्म हो जाने या कम हो जाने का अंदेशा हो। जब आप के रब ने आप को ग़नी कर दिया हे तो ये खज़ाने कभी ख़त्म‌ होने वाले नहीं। फिर आप किसी साइल को क्यों झिड़कें या साइलों की कसरत से तंगदिल क्यों होँ। आप को आप के रब ने बेशुमार दौलतें और बेहिसाब नेमतें अता फ़रमाई हें। आप उन्हें साइल की इस्तिदाद के मुताबिक़ बांटते रहें, आप के दर पर आने वाला कोई साइल ख़ाली ना जाएं।

सीरत की कुतुब एसे अनगिनत वाक़ियात से भरी पड़ी हें, जिन से हुज़ूर स.व. के जूद-ओ-करम का अंदाज़ा होता हें। जो साइल दर ए अक़्दस पर हाज़िर हुआ, उस की झोली भर कर उसे वापिस किया गया और आज भी किशवर माना के इस ताज्दार की सख़ावत की धूम मची हे। कोई आए, जो चाहे मांगे, उसे ख़ाली वापिस नहीं किया जाता।

हज़रत-ए-शैख़ अबद उल-हक़ मुहद्दिस देहलवी रहमत‌ अल्लाह अलैहि ने क्या ख़ूब लिखा है: मालूम होता है कि सब के मुआमलात हुज़ूर स.व. के दस्त हिम्मत-ओ-करामत के सपुर्द हें, जो चाहते हें, जिस को चाहते हें अपने परवरदिगार के इज्न से अता फ़रमाते हैं (अशीअत उल्लमआत अव्वल, सफ़ा ३९६)

इमाम बुख़ारी रहमत‌ अल्लाह अलैहि ने हज़रत जाबिर बिन अबद उल्लाह (रज़ी.) से रिवायत किया हें कि हुज़ूर स.व. ने कभी किसी साइल के जवाब में ला (नहीं) ना फ़रमाया।

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