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माअबाद बिन लादैन (लादैन के बाद भी) जिहाद जारी रहेगा : अस्करीयत पसंद (जंगजू )

पाकिस्तान के शुमाल मग़रिबी (उत्तर पश्चिम) क़बाइली इलाक़े शुमाली (उत्तरी)वज़ीरस्तान में अस्करीयत पसंदों ने पमफ्लेट तक़सीम किए, जिन पर तहरीर है कि वो अपना जिहाद बिलकुल इसी तरह जारी रखेंगे, जैसा उसामा बिन लादैन ने किया। दहश्तगर्द

पाकिस्तान के शुमाल मग़रिबी (उत्तर पश्चिम) क़बाइली इलाक़े शुमाली (उत्तरी)वज़ीरस्तान में अस्करीयत पसंदों ने पमफ्लेट तक़सीम किए, जिन पर तहरीर है कि वो अपना जिहाद बिलकुल इसी तरह जारी रखेंगे, जैसा उसामा बिन लादैन ने किया। दहश्तगर्द तंज़ीम अलक़ायदा के सरबराह उसामा बिन लादैन की हलाकत का एक बरस (वर्ष) मुकम्मल होने पर ये पमफ्लेट तक़सीम किए गए हैं। बिन लादैन को गुज़िश्ता बरस 2 मई को अमरीकी नेवल सेल्ज़ ने एक खु़फ़ीया कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी शहर ऐबटाबाद में हलाक कर दिया था, जब कि बिन लादैन की लाश मुबय्यना तौर पर समुंद्र बुरद कर दी गई थी।

शुमाली (उत्तरी) वज़ीरस्तान के मर्कज़ी शहर मीरान शाह में पिकअप गाड़ीयों पर सवार नकाबपोश अस्करीयत पसंदों ने इस पर्चे की कापीयां तक़सीम कीं। वाज़ेह रहे कि शुमाली (उत्तरी) वज़ीरस्तान को अलक़ायदा और तालिबान का गढ़ समझा जाता है। पाकिस्तानी फ़ौज और अस्करीयत पसंदों के दरमयान गुज़िश्ता चंद रोज़ से शुमाली (उत्तरी) वज़ीरस्तान में झड़पें जारी हैं। तक़सीम करदा इस पर्चे पर दर्ज है : आईये आज अज़म कर लें कि हम अपना जिहाद जारी रखेंगे और अपनी जान और माल-ओ-अस्बाब ख़ुदा की राह में लुटा देंगे बिलकुल वैसे जैसे शेख़ उसामा ने किया। इस पर्चे पर किसी के दस्तखत तो नहीं लेकिन 2 मई की तारीख़ दर्ज है, जो उसामा बिन लादैन की बरसी का दिन है।

पर्चे पर मज़ीद दर्ज है, आज शेख़ उसामा बिन लादैन की शहादत को ठीक एक बरस मुकम्मल हो गया है। हमारा दुश्मन अमरीका नदामत पर मजबूर है। उसे शिकस्त हो रही है और पाकिस्तान का मुस्तक़बिल भी वीरान हो रहा है।वाज़ेह रहे कि ये पर्चा एक ऐसे मौक़ा पर तक़सीम किया गया है, जब पाकिस्तानी फ़ौज और अस्करीयत पसंदों के दरमियान गुज़िश्ता दो रोज़ से झड़पों के नतीजे में 19 फ़ौजी और आम शहरी हलाक हुए हैं। पाकिस्तान अमरीका के इस दबाव को अब तक नजरअंदाज़ करता आया है, जिस में इस से मुतालिबा किया जाता रहा है कि वो शुमाली (उत्तरी) वज़ीरस्तान में अस्करीयत पसंदों के ख़िलाफ़ फ़ौजी कार्रवाई करे।

अफ़्ग़ानिस्तान में मुतय्यिन नाटो अफ़्वाजका मौक़िफ़ है कि शुमाली (उत्तरी) वज़ीरस्तान ही से अस्करीयत पसंद (जंगजू ) सरहद उबूर (पार) कर के अफ़्ग़ानिस्तान में ग़ैर मुल्की फ़ौजीयों के ख़िलाफ़ कार्यवाईयां करते हैं। ताहम गुजिश्ता हफ़्ते उसामा की पहली बरसी का वक़्त पुरसुकून(शांती) अंदाज़ से गुज़र गया।

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