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मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में चीन सबसे खतरनाक स्तिथि में- ब्रिटिश सांसद

लंदन। इस हफ्ते कंजर्वेटिव पार्टी के सांसदों ने ब्रिटेन और चीन की ‘सुनहरी’ दोस्ती को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। इन्होंने कहा कि ब्रिटेन को चीन के साथ अपने संबंधों पर विचार करना चाहिए। इन सांसदों का कहना है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शासन में चीन में व्यापक पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। मंगलवार को दोपहर बाद इस मामले में वेस्टमिन्सटर से एक रिपोर्ट जारी करने की तैयारी है।

इस मामले में सांसदों और ऐक्टिविस्ट ने 2012 में चीन की सत्ता शी द्वारा संभालने के बाद मानवाधिकारों के हुए व्यापक उल्लंघन पर पूरा ब्यौरा तैयार किया है। रिपोर्ट को ‘डार्केस्ट मोमेंट’ कहा गया है। इसमें विस्तार से कई वाकयों को सूचीबद्ध किया गया है। वकीलों के मानवाधिकारों का उल्लंघन, चीनी सुरक्षा बलों द्वारा हॉन्ग कॉन्ग के बुकसेलर्स को संदिग्ध तरीके से नजरबंद करना, ब्लॉगर्स और पत्रकारों पर पाबंदी के साथ असहमतियों को दबाने के सारे मामलों को रिपोर्ट में जगह दी गई है।

कंजर्वेटिव पार्टी ह्यूमन राइट्स कमिशन के चेयरमैन फियोना ब्रूसे ने कहा कि चीन में मानवाधिकारों की हालत बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि शी चिनफिंग के कार्यकाल में चीन ने मानवाधिकारों की पूरी तरह से उपेक्षा की। फियोना ने कहा, ‘लोगों का मानना है कि 1989 के थिननमेन नरसंहार के बाद चीन मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में सबसे बुरी स्थिति में है।

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