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मायावती के अहंकार और उलमा ए दीन को नज़र अंदाज़ करना, हार की बड़ी वजह: आमिर रुश्दी

लखनऊ: (सियासत उर्दू) विभिन्न मुस्लिम संगठनों और उलमा ए दीन की मायावती नीत बहुजन समाज पार्टी को विधानसभा चुनाव से पहले समर्थन देने से पार्टी को कोई फायदा नहीं पहुंचा। उसने सिर्फ 19 सीटें हासिल कीं। यह उसकी सबसे खराब प्रदर्शन में से एक है। बसपा ने लगभग 100 मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किए थे उनमें से केवल चार ने जीत हासिल की। हालांकि 77 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं का बोलबाला है। कुछ उलमा ने भी मुस्लिम मतदाताओं से आग्रह किया था कि बसपा को वोट दें। जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी, शिया आलिम और अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सीनियर सदस्य मौलाना कल्बे जव्वाद के अलावा राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल जिस का पूर्वी यूपी में प्रभाव है, मायावती नीत बसपा का समर्थन किया था।

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मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्रों की सीटों पर जो रामपुर,सहारनपुर,मुरादाबाद,अमरोहा,बरेली,आजमगढ़,मऊ,शाम्बली,मुजफ्फर नगर,मेरठ और अलीगढ़ में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जो बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे सफल नहीं हो सके। रामपुर में मतदाताओं की 50 प्रतिशत संख्या मुस्लिम हैं यहां से बसपा का एक भी विधायक निर्वाचित नहीं हो सका। इसी तरह की स्थिति सहारनपुर और मुरादाबाद में भी देखी गई। बसपा सहारनपुर के देवबंद विधानसभा सीट में भी अपना वजूद मनवाने में असमर्थ रही।

दीनी मदरसे दारुल उलूम देवबंद, देवबंद में स्थित है। अमरोहा,बरेली और शाहजहांपुर में पार्टी का प्रदर्शन दुखद रहा। बसपा शाम्बली,मुजफ्फरनगर, मेरठ और अलीगढ़ में भी डट कर मुकाबला नहीं कर सकी। पार्टी के लिए एकमात्र तसल्ली की बात यह है कि उसने आजमगढ़ जिले के सगरी,मुबारकपुर, लालगंज और दीदार गंज विधानसभा क्षेत्रों से सफलता हासिल की। मऊ जिले में मऊ विधानसभा सीट को छोड़कर जिस पर मुख्तार अंसारी ने जीत हासिल की, पार्टी एक भी सीट पर सफल नहीं हो सकी। मुख्तार अंसारी के पुत्र और भाई भी असफल हुए। बसपा की विफलता के कारणों के सवाल पर राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष आमिर रुश्दी ने कहा कि बसपा अध्यक्ष मायावती का अहंकार और उलमा को बायपास करने की वजह से भाजपा ने सफलतापूर्वक मुस्लिम वोटों को फैलाने में कामयाबी हासिल की जिसकी वजह से बसपा को नुकसान पहुंचा। पिछले महीने बसपा का समर्थन का आश्वासन देते हुए कोंसिल ने अपने 84 उम्मीदवारों को मुकाबला से हटा दिया था। कोंसिल के अध्यक्ष ने कहा कि समय का तकाजा है कि राज्य और देश दोनों के हितों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि बसपा और कोंसिल लगातार सहयोग करते रहेंगे ताकि फासीवादी ताकतों को राज्य में हावी होने से रोका जाए और साथ ही साथ राज्य को गुंडाराज और परिवार वाद (खानदानी राजनीति) से मुक्ति दिलवाई जाए।

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